
शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (एचपीएसईबीएल) में किए गए डिजिटल एवं प्रशासनिक सुधारों से राज्य को तीन वर्षों में कुल 16.83 करोड़ रुपये की बचत होगी। यह सरकार की व्यवस्था परिवर्तन और पारदर्शी शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शी खरीद प्रक्रिया अपनाने तथा महंगी आउटसोर्सिंग पर निर्भरता कम करने से एचपीएसईबीएल की बिजली बिलिंग और एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) सहायता सेवाओं पर होने वाला खर्च 46 प्रतिशत तक घटा है। इन सेवाओं पर वार्षिक व्यय 12.29 करोड़ रुपये से घटकर 6.68 करोड़ रुपये रह गया है।
इन सुधारों से प्रतिवर्ष लगभग 5.61 करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी, जिससे तीन वर्षों में कुल 16.83 करोड़ रुपये का लाभ होगा। इस बचत की राशि का उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं और आवश्यक सेवाओं को मजबूत करने में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने एचपीएसईबीएल का डिजिटलीकरण लगभग 29 लाख घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से किया है। ऑनलाइन नए बिजली कनेक्शन, स्मार्ट बिलिंग, प्रीपेड मीटरिंग, ऑनलाइन बिल भुगतान और डिजिटल शिकायत निवारण जैसी सुविधाओं से न केवल प्रक्रियागत देरी कम हुई है, बल्कि उपभोक्ताओं को पारदर्शिता भी सुनिश्चित हुई है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता सेवाओं को सशक्त बनाने और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए एचपीएसईबीएल में एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण लागू किया गया है। सरकार एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (एटीएंडसी) हानियों को कम करने, समय पर बिलिंग और राजस्व वसूली सुनिश्चित करने तथा परिचालन व्यय के युक्तिकरण पर विशेष ध्यान दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर बिजली खरीद योजना, डेटा आधारित निर्णय प्रणाली और बिजनेस इंटेलिजेंस (बीआई) जैसे आधुनिक तकनीकी प्लेटफॉर्म के एकीकरण से बोर्ड की वित्तीय स्थिति और सुदृढ़ होगी तथा प्रदेश में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन का उद्देश्य संस्थानों को आत्मनिर्भर, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाना है, ताकि वर्ष 2027 तक एक आधुनिक और आत्मनिर्भर हिमाचल की मजबूत नींव रखी जा सके।





