एससी-एसटी में क्रिमि लेयर व्यवस्था लागू रखना गरीब दलित के पेट पर लात मारने के समान : रूमित सिंह ठाकुर

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

12 अगस्त 2024

देवभूमि क्षत्रिय संगठन सवर्ण मोर्चा वी राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के संस्थापक एवं अध्यक्ष रूमित सिंह ठाकुर ने कहा की सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ इतना कहा था, की अपनी जात बिरादरी के गरीब लोगों को दो-चार रूखे सूखे निवाले दे दो। जो सच में भूखा है गरीब है उनको कतार में आगे आने दो । लेकिन जाति के आरक्षण में क्रिमिलेएर व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले लोगों के पेट में दर्द शुरू हो गई । एससी एसटी क्रीमीलेयर आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को केंद्र सरकार द्वारा खारिज करना हिटलर शाही दर्शाता है ,और अपनी सुविधा अनुसार अपने फायदे अनुसार न्यायपालिका का प्रयोग करना देश के नेताओं की मानसिकता को साफ दर्शाता है। एससी एसटी आरक्षण में क्रिमि लेयर व्यवस्था को बाहर करना गरीब दलित समाज के लिए उपहार था, लेकिन उनके पेट पर लात मारी गई।जो हमेशा से गरीब दलित समाज के अधिकारों को निगलता आया टैक्स पेय ,आईएएस ,आईपीएस ,एसपीएस आर्थिक मजबूत ,विधायक ,मंत्री नेता को आरक्षण के लाभ की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन यह लोग कभी नहीं चाहते कि गरीबों को उसका हक मिले।

लोकसभा में सांसदों के रूप में बैठे सभी राजनीतिक पार्टियों सुप्रीम कोर्ट के सुझाव या निर्णय का एक स्वर में विरोध कर रही थी। जिससे जाहिर होता है कि कोर्ट में सात जजों की बेंच का जो फैसला न्यायपालिका के माध्यम से उनके लिए कुछ मायने नहीं रखता। मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कैबिनेट बुलाकर खारिज कर दिया, जिसमें सभी क्रिमि लेयर में आने वाले दलित नेताओं जैसे चिराग पासवान , खड़गे , अश्विनी वैष्णव ,फागण सिंह कुलसते जैसे नेताओं के पेट में दर्द होने शुरू हो गई। एससी-एसटी में क्रिमि लेयर व्यवस्था लागू रखने या प्रावधान रखना गरीब दलित के पेट पर लात मारने के समान है। इनका सबका मानना है कि जो आईएएस, आईपीएस , मंत्री, विधायक बन जाए उसकी पीढ़ी दर पीढ़ी गरीब दलित का हक मार कर आरक्षण का लाभ लेते रहे ।
1अगस्त 24 को यह फैसला आया था, छुआछूत को बढ़ावा खुद देते रहे हैं और इल्जाम सवर्ण जातियों पर लगाते रहे। जातिवाद की खाई खुद खोद कर रखी है ।इनकी दुकान चलती रहे यही सबक मानना है।

चिराग पासवान का बयान है कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सहमत नहीं हैं अमिर को अमीर, गरीब का नामों निशान मिटाने जैसा है मेरा यह मानना है कि अगर यह इतने हिमायती होते अपने समाज के हितों के तो क्रिमि लेयर व्यवस्था लागू करते हैं ,व गरीब को उसका हक देते । नेता अपने फायदे व अपने सुविधा अनुसार हमेशा न्यायपालिका का प्रयोग करते आए हैं,उन्होंने किसी मुद्दे से बचाना होता है तो न्यायपालिका पर डाल देते हैं, और जब वही न्यायपालिका उनकी सुविधा अनुसार बात नहीं करें तो न्यायपालिका को नकार देते हैं। इन नेताओं की बातों से पता चलता है कि न्यायपालिका इन के लिए मात्र कठपुतली है इसके अलावा कुछ नहीं। लड़ाई गरीब वर्सेस अमीर इस देश की सबसे बढ़ि लड़ाई है । संविधान का हवाला दिया जाता है संविधान कमेटी में और लोग भी थे, 7 लोगों की मुख्य कमेटी 389 लोगों की कुल कमेटी थी, जिसमें इस संविधान को बनाया गया। भारतीय संविधान मूल रूप से 395 अनुच्छेदों और 28 अनुसूचियां के साथ 22 भागों में विभाजितकिया ।इसके अलावा संविधान में एक प्रस्तावना एक पूर्ण कथा और एक अनुसूचित क्षेत्र की सूची शामिल थी। 127 बार इसमें संशोधन और परिवर्तन किया गया।

भारतीय संविधान में कुल 251 पेज से संशोधन और परिवर्तनों के साथ वर्तमान में 450 पन्नों का भारतीय संविधान है ।संविधान को बनाने में 2 साल 11 महीने 18 दिन का समय लगा था, इस समय के बीच में किसी भी नेता को यह ध्यान नहीं आया इस देश में सामान्य वर्ग के लोग भी रहते हैं, सवर्ण जातियां भी रहती हैं, जिनके हक़ की बात भी देश के संविधान में होनी चाहिए। लेकिन किसी ने इस और ध्यान नहीं दिया । आर्टिकल 16 समानता का अधिकार देता है लेकिन वास्तविकता में कहीं पर भी इसे लागू नहीं किया जाता। देश की सरकार के द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को खारिज करना इस देश की सबसे बड़ी विडंबना है और गरीब तबके के अधिकारों का हनन है ,उनके पेट पर लात है देवभूमि क्षत्रिय संगठन सवर्ण मोर्चा और राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी हर स्तर पर यह लड़ाई लड़ेगी। गरीब को उसका हक मिले इस और हम अपने कदम मजबूती के साथ बढ़ाएंगे।

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