कांग्रेस के लिए ट्रंप कार्ड साबित हुआ बजरंगबली : पुरानी पेंशन का मुद्दा

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

13 मई 2023

कर्नाटक फतह करने के साथ ही कांग्रेस ने अपने सियासी तरकस में दो तरह के ‘बाण’ तैयार कर लिए हैं। इसमें एक तो है ‘बजरंग बाण’ और दूसरा है ‘रामबाण’। ‘रामबाण’ के तौर पर कांग्रेस अपने उस सियासी तरकश से ‘ओल्ड पेंशन स्कीम’ को उत्तर भारत के राज्यों में होने वाले चुनावों में इस्तेमाल करेगा, जबकि ‘बजरंग बाण’ के तौर पर हाल में ही कर्नाटक में कांग्रेस की ओर से जगह-जगह बनाए जाने वाले मंदिर और उन मंदिरों की देखरेख के लिए बनाए जाने वाले स्पेशल बोर्ड के गठन के वादे के साथ तैयार किया गया है। राजनीतिक विश्लेषक से लेकर कांग्रेस पार्टी के नेता भी इस बात को मानते हैं कि ओल्ड पेंशन स्कीम तो आने वाले चुनावों में कांग्रेस के लिए रामबाण साबित होने वाली है, जबकि बजरंगबली के नाम से आगामी चुनावों में अभी से सियासी मुद्दा बनाने के लिए कांग्रेस के कई नेता जमकर इस शब्द का इस्तेमाल करने लगे हैं।

जिस तरीके से कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश और उसके बाद कर्नाटक में ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने का भरोसा दिलाने के साथ सियासत में बड़ा उलटफेर कर दिया है। उससे अनुमान अब यही लगाया जा रहा है कि लोकसभा चुनावों से पहले भी कांग्रेस इस मुद्दे को बड़े जोर शोर के साथ आगे लेकर आने वाली है। पार्टी के नेताओं ने कई बैठकों के बाद यह तय किया था कि ओल्ड पेंशन स्कीम को राज्यों में बहाल किया जाएगा। वह कहते हैं कि हिमाचल और कर्नाटक में लाखों कर्मचारियों ने कांग्रेस के इस वादे पर भरोसा जताया। वह अपनी पहली कैबिनेट के साथ इसको लागू भी कर रहे हैं। कांग्रेस के नेताओं ओल्ड पेंशन स्कीम के बाद चुनावों के नतीजे बदले हुए मिल रहे हैं। उससे पार्टी ने आने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों से पहले इस संबंध में पूरी कार्ययोजना ड्राफ्ट करने का निर्देश भी दिया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद पीएल पुनिया कहते हैं कि उनकी पार्टी हमेशा से कर्मचारियों के हितों के लिए ही लड़ाई लड़ती आई है। उनका कहना है क्योंकि वह खुद ब्यूरोक्रेट रहे हैं इसलिए कर्मचारियों के पेंशन के दर्द को बखूबी समझते हैं। ओल्ड पेंशन स्कीम के माध्यम से न सिर्फ कर्मचारियों का रिटायरमेंट के बाद बेहतर जीवन स्तर और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिलती है बल्कि इससे सरकार के राजस्व को भी कोई हानि नहीं होती है। पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि आने वाले चुनावों में उनकी पार्टी ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने के साथ ही सियासी मैदान में उतरेगी। क्योंकि इसी साल छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत तेलंगाना में चुनाव है। पार्टी के चुनावी मेनिफेस्टो को तय करने वाली कमेटी से जुड़े वरिष्ठ नेता कहते हैं कि इन सभी राज्यों में जहां पर कांग्रेस की सरकार नहीं है वहां पर ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने और उसका राज्य के लाखों कर्मचारियों को फायदा दिलाने का काम उनकी कांग्रेस सरकार करेगी।

 

Karnataka Election Bajrangbali Old pension scheme Will Congress able to control North India these issues
दरअसल कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने राज्य में चुनाव के दौरान अलग-अलग जगहों पर पूरे कर्नाटक में हनुमान मंदिर बनवाने की घोषणा कर दी। हालांकि राज्य में जगह-जगह बनवाए जाने वाले हनुमान मंदिर का वादा भारतीय जनता पार्टी के कांग्रेस पर बजरंगबली के मुद्दे से हमलावर होने के बाद किया। यही नहीं डीके शिवकुमार ने तो यह तक कहा कि उन मंदिरों की देखरेख और उसकी पूरी मॉनिटरिंग के लिए विशेष बोर्ड का गठन भी कर्नाटक में किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार एनएम स्वामी कहते हैं कि भले ही यह दांव भारतीय जनता पार्टी के काउंटर अटैक से बचने के लिए कांग्रेस ने खेला हो लेकिन उत्तर भारत में कांग्रेस इस दांव का इस्तेमाल करके सियासी रूप से मजबूत होने का प्रयास करेगी।

कर्नाटक में बजरंग दल पर पाबंदी लगाने के घोषणा पत्र के साथ ही जो सियासी बवाल मचना शुरू हुआ उसको एक तरह से काउंटर करते हुए ही कांग्रेस ने बजरंगबली के विचारों को घर-घर तक पहुंचाने और उनके रास्ते पर चलने के लिए अपनी हर मीटिंग और जनसभाओं में जिक्र करना शुरू कर दिया। कर्नाटक कांग्रेस पार्टी के एसआर बोपन्ना कहते हैं कि बजरंगबली के विचारों को घर-घर तक पहुंचाने में क्या बुराई है। उनकी पार्टी ने हनुमान जी के बनने वाले मंदिरों की प्रकृति को जानने और उनके विचारों को हर घर तक पहुंचाने के लिए अगर किसी बोर्ड के गठन की बात की है या जगह-जगह मंदिर बनवाने की बात की है तो इससे लोगों की आस्था ही जुड़ेगी।

राजनीतिक विश्लेषके और वरिष्ठ पत्रकार सुदर्शन का कहना है कि चुनाव की शुरुआत से पहले और अन्य सामान्य दिनों में भी कांग्रेस की ओर से बजरंगबली का जिक्र अमूमन सियासी तौर पर नहीं किया जाता था। मंदिरों में जाना पूजा अर्चना जरूर सियासी नजरिए से देखा जाने लगा लेकिन इस चुनाव में जैसे ही कांग्रेस के घोषणा पत्र में बजरंग दल पर प्रतिबंध की बात सामने आई तो भारतीय जनता पार्टी ने इसको मुद्दा बनाते हुए बजरंगबली की एंट्री करा दी। वह कहते हैं कि कांग्रेस ने सधे हुए तरीके से उस पूरे सियासी माहौल को अपने पाले में करने के लिए राज्य में जगह-जगह हनुमान मंदिर बनवाए जाने का “बजरंग बाण” छोड़ दिया। अब यही बजरंग बाण उत्तर भारत के चुनाव में चलने का अनुमान लगाया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी को सियासी तौर पर कितना फायदा करेगा यह तो आने वाले चुनावों में बजरंगबली के नाम के साथ चलने वाले सियासी तीर से पता चलेगा। हालांकि कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बजरंगबली उनके लिए और उनके कार्यकर्ताओं के लिए भी उतने ही आस्था का विषय है जितना कि भारतीय जनता पार्टी के लिए। यही वजह है की पार्टी के कई प्रमुख बड़े नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से जय बजरंगबली का नारा भी लगाना शुरू कर दिया है

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

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