कुल्लू : कुल्लू में हाईफ्लो-ऐप परियोजना: हिमालयी बाढ़ जोखिम घटाने के लिए नया शोध

हिमालयी क्षेत्रों में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लगातार बढ़ते खतरे के बीच, एक अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना हाईफ्लो-ऐप सक्रिय रूप से कार्यरत है।यह परियोजना यूनिवर्सिटी ऑफ कम्ब्रिया (यूके) के नेतृत्व में यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली, गोविन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान, यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लॉसेस्टरशायर, कारिटास इंडियाऔर क्लाइमेट बी वेंचर के सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है।
हाईफ्लो-ऐप एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य कुल्लू जिले में ऐतिहासिक बाढ़ डेटा, नदी प्रवाह, वर्षा पैटर्न और जोखिम मानचित्रों को एकीकृत कर स्थानीय समुदायों, प्रशासन और नीति निर्माताओं को जलवायु जनित आपदाओं के प्रति सतर्क और सक्षम बनाना है। यह ऐप वैज्ञानिक शोध और स्थानीय ज्ञान को जोड़ते हुए डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली को मजबूत करेगा। परियोजना के अंतर्गत स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएँ और सहभागी अनुसंधान गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इससे न केवल आपदा जोखिम न्यूनीकरण को बल मिलेगा, बल्कि हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु अनुकूलन और सतत विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे। परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, हाईफ्लो-ऐप भविष्य में हिमालयी क्षेत्रों के लिए जलवायु-आधारित योजना निर्माण और नीति विकास का एक प्रभावी उपकरण सिद्ध होगा और भारत–ब्रिटेन के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। हाईफ्लो-ऐप परियोजना का मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले जैसे हिमालयी संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ और जलवायु जनित आपदाओं के जोखिम को कम करेगी। यह परियोजना ऐतिहासिक बाढ़ डेटा, जलवायु प्रवृत्तियों और स्थानीय ज्ञान को एक मंच पर लाकर समुदायों, प्रशासन और नीति निर्माताओं को समय पर सूचना और निर्णय समर्थन प्रदान करेगी। साथ ही, इसका लक्ष्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति स्थानीय स्तर पर अनुकूलन क्षमता को मजबूत करना है। यह ऐप शोध संस्थानों, स्थानीय प्रशासन और समुदायों के बीच डेटा साझा करने और संवाद का माध्यम होगा। परियोजना में प्रशिक्षण, कार्यशालाएँ और सहभागी अनुसंधान को भी शामिल किया गया है, जिससे स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

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