
खबर अभी अभी ब्यूरो सोलन
6 जुलाई 2023

लूरमा पीठ पर पानी ढोकर पशुओं को पिलाती हैं। किसी भी सरकारी योजना का लाभ आज तक लूरमा देवी को नहीं मिला है और न ही लूरमा को योजनाओं की जानकारी है।
73 साल की लूरमा देवी का पशु प्रेम हर किसी के लिए मिसाल है। खुद को कुछ खाने के लिए मिले या नहीं। इसकी परवाह नहीं, लेकिन पशु भूखे नहीं रहने चाहिए। इनके लिए घास और पानी की व्यवस्था लूरमा करती हैं। आसपास पानी की व्यवस्था नहीं है। खड्ड एक किमी दूर है।
लूरमा पीठ पर पानी ढोकर पशुओं को पिलाती हैं। किसी भी सरकारी योजना का लाभ आज तक लूरमा देवी को नहीं मिला है और न ही लूरमा को योजनाओं की जानकारी है। ऐसे में सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
इन्हीं लावारिस पशुओं के गोबर से बुजुर्ग को थोड़े बहुत पैसे मिल जाते थे, लेकिन अब गोबर खरीदने भी कोई नहीं आ रहा। कोई खाने को कुछ दे तो लूरमा का पेट भर जाता है। आनी खंड की कमांद पंचायत की घढ़ारी गांव की लूरमा देवी की खुद की जिंदगी संघर्ष से भरी है।
लूरमा ने सभी पशुओं को वहां रखना शुरू किया। पिछले 14 साल से इसी टूटे फूटे कमरे में लूरमा गुजर बसर कर रही हैं। जंगल होने के चलते यहां जंगली जानवरों ने लूरमा देवी के 14 पशुओं को मार डाला। अब 11 पशुओं को बचाना चुनौती बना हुआ है। लूरमा देवी बड़े शौक से पशुओं को पाल रही हैं।





