बेटी थी तो पैदा होते ही दफना दी, मां ने निकाला बाहर , अब गुलाबो हैं पद्मश्री कालबेलिया नर्तकी

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

27 जुलाई 2023

Padmashri Gulabo Sapera: she was buried as soon as she was born, the mother pulled her out, now Gulabo is a Pa

जन्म के बाद पांच घंटे तक मिट्टी में दबी रही और फिर कालबेलिया नर्तकी के रूप में वह देशभर में मशहूर हुईं। अब 165 देशों का भ्रमण कर चुकी इस नर्तकी ने कई संघर्ष झेले लेकिन कभी हार नहीं मानी। यहां बात हो रही है पद्मश्री गुलाबो सपेरा की। गेयटी थियेटर में आकाशवाणी शिमला की ओर से आयोजित लोक संगीत सभा में भाग लेने पहुंची पद्मश्री गुलाबो सपेरा ने बताया कि जन्म के तुरंत के बाद उन्हें दाई ने मिट्टी के गड्ढे में दफना दिया था।

लेकिन मां और मौसी ने अपनी सूझबूझ से उन्हें गड्ढे से बाहर जिंदा निकाला। बताया कि इनका जन्म राजस्थान के कालबेलिया समुदाय में हुआ था। यहां के लोग बेटी के जन्म को बुरा मानते थे लेकिन मां को जैसी ही पता चला मुझे जन्म के बाद गड्ढे में दफना दिया तो वह तुरंत मौसी के साथ वहां पहुंची तथा मुझेे गड्ढे से बाहर निकाला।

गड्ढे से निकालते ही मेरी सांसे फिर चल पड़ीं। इसके बाद में गुलाबों ने पिता के साथ घूमकर सपेरा डांस किया। इनकी मेहनत और लगन ही थी कि उन्हें एक दिन अपने संघर्षों का फल मिला। राजस्थान सरकार ने उनका साथ दिया और इस साथ के चलते उन्होंने अपने नृत्य के हुनर को सुधारा। आज इन्हें कालबेलिया नृत्य के अविष्कार के रूप में जाना जाता है। वर्ष 2016 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। गुलाबो सपेरा ने कहा कि चौथी बार प्रस्तुति देने के लिए वह शिमला आई हैं। वह शिमला में आकर पहाड़ों के बीच शांति महसूस करती हैं। आगे जब भी शिमला आने का मौका मिलेगा तो वह जरूर आएंगी।

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

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