
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
9 मार्च 2023
तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाईलामा ने बौद्ध धर्म की महिमा बताते हुए कहा कि सामान्य तौर पर चीन एक बौद्ध राष्ट्र था। तिब्बत में रहते हुए मैं कई बार चीन गया। मैंने देखा कि वहां बहुत से बौद्ध विहार और मठ थे। इससे सिद्ध होता है कि महात्मा बुद्ध की सत्ता चीन में भी अच्छे से व्याप्त थी। आज भी चीन में बौद्ध धर्म में रुचि दिखाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मैक्लोडगंज में जातक कथाओं पर प्रवचन देते हुए दलाईलामा ने कहा कि चीन में परिवर्तन हो रहे हैं। राजनीति में भी परिवर्तन हो रहे हैं। पढ़े-लिखे और शोध करने वाले चीनी आज भी बता सकते हैं कि भारत में रह रहे तिब्बतियों की स्थिति अच्छी है। यह एक अच्छा संकेत है। आप भी एक से दस और फिर सौ लोगों तक बुद्ध के दर्शन को पहुंचाएं।
दलाईलामा ने कहा कि धर्म एक व्यक्ति का नहीं है। यह सभी लोगों के लिए है। केवल मुख से व्याख्या करने से लाभ नहीं होने वाला। रिंपोछे कहते भी हैं कि दूसरों के चित्त को शुद्ध करने से पहले, स्वयं धर्म का अभ्यास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। हमारा देश भले हमसे छूट गया हो, मगर बौद्ध संस्कृति और दर्शन के संरक्षण के लिए हम सभी ने उचित ध्यान दिया है। धर्मगुरु ने कहा कि दुख को समाप्त करने के लिए हमें अपने अंदर के क्लेश और स्वार्थ चित्त को खत्म करना होगा। शून्यता का अभ्यास करना चाहिए।
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