मार्किट फीस की राशि को कोल स्टोरेज और मंडियों के विस्तार में किया जाए खर्च : बागवान

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

3 जून 2023

प्रदेश सेब उत्पादक संघ का शिमला जिला के कुमारसैन में सेब उत्पादकों की  विभिन्न समस्याओं पर मंथन के लिए  सम्मेलन  हुआ। इस दौरान  बागवान प्रतिनिधियों ने बताया  सरकार द्वारा अब तक  उठाये गए कदम बागवानों के हित  में नहीं है।  इस के लिए बागवानों को जल्द आंदोलन की राह  अपनानी होगी।  सम्मेलन में  सेब उत्पादक संघ के राज्यध्यक्ष  सोहन ठाकुर , पूर्व विधायक राकेश सिंघा , शिमला के पूर्व मेयर  संजय चौहान , किसान  सभा नेता ओंकार शाद , प्रेम ठाकुर आदि ने बताया किसान बागवानों को अपने हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए संयुक्त रूप से आगे आना होगा।

इस दौरान उन्होंने कहा  प्रदेश में उन आढ़तियों  को ही लाइसेंस दी जाए ,जिन के पास सटोरेज की व्यवस्था हो। एपीएमसी के कानूनों में भी संशोधन की मांग की और
बताया मार्किट फ़ीस का पैसा सीए स्टोर निर्माण और मंडियों को सुदृढ़ करने में लगाया जाए। उन्होंने कहा वर्तमान में  प्रदेश में सेब खरीद रहे आढ़ती प्रति पेटी  दी जाने वाली  मार्किट फ़ीस में भी  हेरा फेरी कर रहे है। यह एक बहुत बड़ा घोटाला है। अगर आढ़ती दैनिक दस हजार पेटी  सेब प्रदेश से बाहर भेजता है तो एपीएमसी के खाते  केवल पांच सौ या  हजार पेटी की ही फ़ीस जमा होती है।

सेब उत्पादक संघ के राज्य अध्यक्ष  सोहन ठाकुर ने बताया कि राज्य स्तरीय कमेटी की आज बैठक मुद्दा उठा की  जो सरकार ने पिछले दिनों फैसले   लिए वह किसानों के पक्ष में नहीं है।  एपीएमसी एक्ट को   लागू गंभीरता से  करना होगा।  एपीएमसी एक्ट किसान के पक्ष में बिल्कुल नहीं है चाहे वह मार्केटिंग को लेकर हो  या  सुविधाओं  को।  एपीएमसी को मार्केटिंग फीस के रूप में जो  पैसा  जमा हो रहा है वह सड़कों को बनाने में खर्च हो रहा है। और इसमें एक संगीन मसला सामने आ रहा है  , इस पर सरकार के बिल्कुल चिंता नहीं है। एक फीसदी मार्किट फ़ीस प्रदेश में आढ़त चला रहे आढ़ती एपीएमसी को ईमानदारी से नहीं दे रहे है। आढ़ती दस हजार पेटी बाहर भेजता है तो एपीएमसी को पांच सौ या हजार  ही  दर्शाता है।

राकेश सिंघा  ने बताया   अगर यही रवैया हिमाचल प्रदेश की सरकार का रहेगा  तो बागवान जल्द आंदोलन की  अपनायेगे।  सरकार दिखाना तो चाहती है कि  सरकार सेब बागवानों के साथ है, लेकिन हकीकत में जो  निर्णय अभी तक हिमाचल प्रदेश की सरकार ने लिए  है वो बागवानों के पक्ष में नहीं जाने वाले हैं। उन्होंने कहा  इस महीने के अंत तक जन आंदोलन को खड़ा करने के लिए कार्य नीति निर्धारित की जाएगी और जितने भी बागवान   संगठन  है एक मंच पर एकत्रित हो कर हक़ की लड़ाई लड़ेंगे।

बागवान हरी चंद  रोच ने बताया कि एपीएमसी का काम है मार्केट को सशक्त करना लेकिन वर्तमान में  पैसा सड़कों पर  खर्च हो रहा है। बागवानों को मज़बूत  सीए स्टोर होने चाहिए ताकि बागवान अपना उत्पाद न स्टोर कर सके।  उन्होंने कहा कि वास्तव में उसी  आढ़ती को लाइसेंस दिया जाना चाहिए जिसके पास स्टोरेज की क्षमता हो। आईआईपी ने पेटी बीस किलो के लिए  बनाई  है।  उस की स्ट्रेंथ भी बिस किलो के लिए है उस का स्टेंडर्ड भी इंटरनेशनल है।  भारत में 44 देशो से सेब आ रहा है उन का भी वही
स्टेंडर्ड है।  फिर बागवानों से आढ़ती बीस किलो से अधिक भर की पेटी की क्यों मांग कर रहे है।

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

Share the news