
भारत के गोल्डन बॉय, नीरज चोपड़ा अब सिर्फ ट्रैक और फील्ड के ही नहीं, बल्कि सेना के भी शेर बन चुके हैं। टोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक में गोल्ड लाकर देश का सिर ऊंचा करने वाले नीरज को हाल ही में टेरिटोरियल आर्मी में ‘लेफ्टिनेंट कर्नल’ की मानद रैंक से सम्मानित किया गया है। अब सवाल उठता है – क्या उन्हें इस रैंक पर सैलरी मिलेगी? और असल में नीरज एक साल में कितनी कमाई करते हैं? चलिए, आपको बताते हैं इस प्रतिष्ठित पद और उनके इनकम से जुड़ी हर जरूरी जानकारी।
लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक, लेकिन सैलरी का क्या?
टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल का पद बेहद मान-सम्मान वाला होता है। लेकिन चूंकि नीरज चोपड़ा को यह रैंक मानद (Honorary) तौर पर दी गई है, इसलिए उन्हें इस पर नियमित सैलरी नहीं दी जाएगी।
कब मिलती है सैलरी?
-अगर नीरज चोपड़ा को किसी ड्यूटी, ट्रेनिंग या विशेष सेवा के लिए बुलाया जाता है, तब उन्हें तय सरकारी वेतन और भत्ते दिए जाएंगे।
-इस रैंक की मूल सैलरी रेंज होती है ₹1,21,200 से ₹2,12,400 प्रति माह। इसके साथ मिलने वाले अलाउंस इस प्रकार हैं:
- मिलिट्री सर्विस पे
- फील्ड एरिया अलाउंस
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- यूनिफॉर्म अलाउंस
- हाउस रेंट, डीए और ट्रांसपोर्ट भत्ते आदि
लेकिन ये सब तभी, जब वे सक्रिय ड्यूटी पर हों।
नीरज चोपड़ा की वार्षिक कमाई कितनी है?
भले ही उन्हें आर्मी से नियमित सैलरी न मिलती हो, लेकिन स्पॉन्सरशिप, ब्रांड एंडोर्समेंट और पुरस्कारों से नीरज करोड़ों में कमा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार:
- नीरज की सालाना इनकम: लगभग ₹4 करोड़
- नेट वर्थ: करीब ₹37 करोड़
- ब्रांड एंडोर्समेंट फीस: एक विज्ञापन के लिए नीरज ₹1 करोड़ तक चार्ज करते हैं
- प्रमुख ब्रांड्स: Tata AIA, BYJU’S, JSW, Amstrad, CRED, Under Armour आदि
सेना से पुराना नाता – पहले थे सूबेदार मेजर
नीरज चोपड़ा का सेना से जुड़ाव नया नहीं है। वे इससे पहले भारतीय सेना में ‘सूबेदार मेजर’ के पद पर थे और 2024 में रिटायरमेंट के करीब थे। लेकिन अब उन्हें टेरिटोरियल आर्मी में शामिल कर, उनकी सेवाओं को और सम्मानित किया गया है।टेरिटोरियल आर्मी क्या है?
- स्थापना: 1949, अधिनियम 1948 के तहत
- स्वरूप: यह सेना का अंशकालिक पूरक बल है
- काम: आपातकाल, प्राकृतिक आपदा, आंतरिक सुरक्षा में सहायता
- किसके लिए: पेशेवर लोग जो सेना में सेवा देना चाहते हैं
- ट्रेनिंग: साल में कुछ सप्ताह/महीनों की ट्रेनिंग होती है
टेरिटोरियल आर्मी के जवान तभी एक्टिव होते हैं जब उन्हें ज़रूरत के समय बुलाया जाए — युद्ध, आपदा या राष्ट्रीय संकट जैसे हालातों में।
नीरज चोपड़ा: नाम ही काफी है
हरियाणा के पानीपत जिले के खंडरा गांव से निकलकर दुनिया भर में भारत का झंडा बुलंद करने वाले नीरज ने:
- टोक्यो ओलंपिक 2020: गोल्ड मेडल
- पेरिस 2024: सिल्वर मेडल
- वर्ल्ड एथलेटिक्स 2023: गोल्ड
जैसे रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। अब वे टेरिटोरियल आर्मी के लेफ्टिनेंट कर्नल बनकर नई प्रेरणा बन चुके हैं।





