
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
15 मई 2023
प्रदेश सरकार की ओर से लगातार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन यह दावे कहीं न कहीं खोखले भी साबित हो रहे हैं। प्रदेश में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सुविधा सरकार की ओर से दी गई है। लेकिन बीमार मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने वाली एंबुलेंंस खुद ही बीमार हो गई हैं
हालत यह है कि खटारा 108 एंबुलेंस में मरीजों को ढोया जा रहा है। ऐसे में मरीज और एंबुलेंस स्टाफ कर्मचारियों की जान पर खतरा मंडराया हुआ है। एंबुलेंस कर्मी कई बार समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों और कंपनी को सूचित कर चुके हैं। लेकिन समस्या बताने पर कंपनी की ओर से स्टाफ को निकालने की धमकी दी जाती है। इसके चलते स्टाफ खराब एंबुलेंस को चलाने पर मजबूर हो रहे हैं। खराब एंबुलेंस को दौड़ाने का पहला मामला नहीं है। बल्कि इससे पहले भी कई बार कई जगहों में एंबुलेंस खराब हो चुकी है। यहीं नहीं एंबुलेंस का टायर खुलना और स्टेयरिंग फ्री होने का मामले भी आ चुके हैं। लेकिन इस और न तो एंबुलेंस का संचालन कर रही कंपनी ध्यान दे रही हैं और न ही सरकार। इसके चलते मरीज और स्टाफ जान हथेली पर रख कर एंबुलेंस में आ रहे हैं।
प्रदेश में 108 एंबुलेंस का संचालन बीते एक वर्ष से मेडसवान फाउंनडेशन की ओर से किया जा रहा है। कंपनी ने शुरुआत में कई प्रकार के दावे लोगों से किए थे। वहीं प्रदेश में 108 एंबुलेंस की बेहतर सुविधा देने के लिए कहा था। लेकिन इन दिनों बिल्कुल विपरीत होना शुरू हो गया है और कंपनी सड़कों पर दौड़ने वाली एंबुलेंस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। ऐसे में लोगों को काफी दिक्कतें आ सकती हैं। हालांकि कुछ समय पहले कंपनी की ओर से 108 एंबुलेंस के बेड़े में नई गाडिय़ों को शामिल किया था। लेकिन पुराने वाली एंबुलेंस को बंद नहीं किया गया। उन एंबुलेंस को इनके साथ ही चलाया जा रहा है। जिसके चलते लोगों की जान से भी खिलवाड़ हो रहा है। हाल ही में शिमला में आईजीएमसी में 108 एंबुलेंस कई बार खराब हो चुकी है। वहीं इस एंबुलेंस का आठ से नौ बार स्टेयरिंग भी फ्री हो चुका है। इसके बाद भी एंबुलेंस को बदला नहीं गया है।
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