
#खबर अभी अभी सोेलन ब्यूरो*
4 अगस्त 2023
हिमाचल प्रदेश में चरमराती स्वास्थ्य सेवाएं आपदा की स्थिति में एक भयानक रूप धारण कर रही हैं। अस्पतालों में जहां मूलभूत सुविधाओं का आभाव है वही अल्ट्रासाउंड से लेकर सिटी स्कैन, मलेरिया, डेंगू व आंखें टेस्ट करने वाले उपकरण या तो खराब पड़े हैं या उन्हें चलाने वाला कोई नहीं है। नए चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्तियों को लेकर सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है। वार्ड की छते टपक रही है, शौचालयों के दरवाजे टूटे पड़े हैं खिड़कियों के शीशे नहीं है। जनता को भ्रमित करके सत्ता का सुख पाने वाले प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री विरासत में मिली व्यवस्था को कोस कर अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे हैं।
हालत इतनी खराब है कि मुख्यमंत्री को अपना सामान्य उपचार कराने के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल ,चंडीगढ़ का रुख करना पड़ रहा है। जनता को मोबाइल स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाने का गारंटी देखकर भ्रमित करने वाले मूलभूत सुविधाओं के नाम पर पानी तक उपलब्ध नहीं करवा पा रहे। 108 एंबुलेंस की सेवा की तस्वीरें आए दिन देखने को मिलती हैं। कहीं टायर फट रहे हैं तो कहीं ब्रेक नहीं लग रही। जब के केंद्र से जो पैसा आता है उसमें प्रदेश की आंशिक हिस्सेदारी के पश्चात प्रदेश सरकार सुविधाओं को मॉनिटर नहीं कर पा रही है। कामगारों के लिए औद्योगिक क्षेत्र में ESI ई.एस.आई हॉस्पिटल की मूलभूत सुविधाएं के नाम पर केवल रेफरल अस्पताल बंन कर रह गए हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल से सांठगांठ के आरोप सामान्यता लगते हैं।
मजबूरी में प्राइवेट अस्पतालों की तरफ रुख करते मरीजों को HIM कार्ड का लाभ नहीं मिल रहा क्योंकि सरकार निजी क्षेत्र में कार्यरत अस्पतालों को पेमेंट नहीं कर पा रही प्राइवेट डॉक्टर मरीजों को इलाज के लिए आनाकानी कर रहे हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार अपनी प्राथमिकताएं नहीं तय कर पा रही यहां तक के जो दवाइयां मिल रही हैं उनकी गुणवत्ता पर भी प्रश्न चिन्ह है। सरकारी अस्पतालों से जो स्कूलों में कन्याओं के लिए आयरन की गोलियां भेजी जाती हैं वह नियर एक्सपायर दी जा रही हैं।डॉक्टर बाहर से दवाई लिखने को मजबूर हैं। पूर्व की सरकार ने जो ऑक्सीजन प्लांट अस्पतालों में विकसित किए थे या तो उनके रखरखाव में अभाव है या वह धूल फांक रहे हैं।
अस्पताल के भीतर मूलभूत सुविधाओं के नाम पर एक बिस्तर पर तीन-तीन मरीज लेट रहे हैं। अस्पतालों के पास बिस्तर पर बिछाने वाली चद्दर कंबल भी पर्याप्त नहीं है। मरीजों के लिए उपचार वाले बेड की टांगों के नीचे इंटे रखी हुई है। गर्भवती महिलाएं अपनी बारी के इंतजार में जमीन पर बैठने को विवश हैं। मानवता को तार-तार करते हुए मनुष्य के लिए बने अस्पतालों को बद्तर कर दिया है। इन्हीं कर्मचारियों के सहयोग से पूर्व की भाजपा सरकार ने कोविड काल के समय वैक्सीनेशन से लेकर कर अन्य आपदाओं की स्तिथि में अनेक सुविधाएं जनता को उपलब्ध कराई है। वही प्रदेश की जनता आज महंगे इलाज के लिए मजबूर है। सुविधाओं के अभाव में चंडीगढ़ जालंधर पठानकोट जैसी जगहों पर जाने के लिए मजबूर हैं।
#खबर अभी अभी सोेलन ब्यूरो*





