
अनुबंध पर नियुक्त शिक्षकों के वेतन और उच्च वेतनमान से जुड़े मामलों में शिक्षा निदेशालय ने हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद कार्रवाई शुरू कर दी है। निदेशालय से जारी कार्यालय आदेशों में कुछ याचिकाकर्ता शिक्षकों को संशोधित वेतन का लाभ देने और अन्य मामलों पर छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
टीजीटी के पद पर अनुबंध आधार पर नियुक्त कुछ शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नियुक्ति की प्रारंभिक तिथि से संशोधित वेतन देने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम-2022 के अनुसार लाभ दिया जाए। रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित शिक्षक वर्ष 2012, 2014, 2015, 2017, 2018, 2019 और 2021 में अनुबंध आधार पर टीजीटी के पद पर नियुक्त हुए थे और बाद में अलग-अलग वर्षों में नियमित भी किए गए।
इन शिक्षकों ने मांग की थी कि संशोधित वेतनमान के तहत उन्हें 38,100 रुपये के न्यूनतम वेतन का 60 प्रतिशत अनुबंध अवधि से ही दिया जाए। शिक्षा निदेशालय ने आदेश में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार ने संशोधित वेतनमान नियम-2022 की अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत नियमित कर्मचारियों पर तो यह नियम लागू होता है, लेकिन अनुबंध कर्मचारियों के लिए अलग प्रावधान किया गया है। अनुबंध कर्मचारियों के लिए 12 जनवरी 2022 की अधिसूचना के तहत वेतन को नियमित वेतनमान के न्यूनतम स्तर के 60 प्रतिशत के बराबर तय किया गया है।
आदेश में कहा गया है कि हाईकोर्ट में दायर याचिका के निपटारे के बाद और सरकार की मंजूरी मिलने के बाद याचिकाकर्ता शिक्षकों को संशोधित वेतनमान का लाभ देने की अनुमति दी गई है। हालांकि यह लाभ उच्च न्यायालय में लंबित एलपीए के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। एक अन्य आदेश में शिक्षा निदेशालय ने दो वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने के बाद उच्च वेतनमान देने से जुड़े मामलों पर भी कार्रवाई शुरू की है। यह मामला मोहित शर्मा बनाम राज्य सरकार से जुड़े हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर सामने आया है।
इस मामले में कुछ कर्मचारियों ने याचिका दायर कर मांग की थी कि दो वर्ष की नियमित सेवा पूरी होने पर उन्हें उच्च वेतन संरचना में रखा जाए। हाईकोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं के प्रतिनिधित्व पर छह सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए और उन्हें सुनवाई का अवसर भी दिया जाए। वित्त विभाग की 23 जून 2022 की अधिसूचना के अनुसार, वे कर्मचारी जो 3 जनवरी 2022 से पहले नियुक्त हुए थे, उन्हें दो वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने के बाद उच्च वेतन संरचना में स्थान देने का प्रावधान किया गया है।
इसी आधार पर शिक्षा विभाग अब संबंधित मामलों की जांच कर रहा है। शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेशों और वित्त विभाग की अधिसूचनाओं के अनुरूप मामलों की जांच कर पात्र कर्मचारियों को नियमानुसार लाभ दिया जाएगा।





