हिमाचल-उत्तराखंड में पैराग्लाइडिंग स्थल पर लगातार दुर्घटनाएँ चिंताजनक: अनुराग सिंह ठाकुर

हिमाचल प्रदेश: पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने आज लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एयर स्पोर्ट्स, विशेष रूप से पैराग्लाइडिंग में बढ़ते सुरक्षा संकट के मुद्दे पर अपने विचार रखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय का ध्यान इस दिशा में आकर्षित किया। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध पैराग्लाइडिंग स्थलों जैसे मनाली और बीर बिलिंग में हो रही लगातार दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाया, जहां हर साल हजारों पर्यटक आते हैं।

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि हिमाचल और उत्तराखंड में पैराग्लाइडिंग स्थलों पर हो रही दुर्घटनाएँ गंभीर चिंता का विषय हैं। पिछले छह वर्षों में अकेले हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग हादसों में 30 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें बीर-बिलिंग में सबसे अधिक मौतें हुई हैं और इनमें नौ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं कमजोर नियमों, अपर्याप्त प्रशिक्षित पायलटों, खराब उपकरण मानकों, अप्रत्याशित मौसम स्थितियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमी को दर्शाती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के असहयोग के कारण हिमाचल प्रदेश इस वर्ष इंटरनेशनल पैराग्लाइडिंग वर्ल्ड कप चैंपियनशिप की मेजबानी का अवसर खो बैठा, जिससे स्थानीय समुदायों को रोजगार, पर्यटन आय और अंतरराष्ट्रीय पहचान से वंचित होना पड़ा।

लोकसभा में बोलते हुए अनुराग सिंह ठाकुर ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के समक्ष सात सूत्री मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि नेशनल एयर स्पोर्ट्स गाइडलाइंस 2023 (NASG 2023) को तुरंत कानूनी दर्जा दिया जाए, ताकि सभी हितधारकों, इवेंट आयोजकों, ऑपरेटरों, पायलटों और स्थानीय प्रशासन के लिए स्पष्ट जिम्मेदारियां तय हों और नियमों की अनदेखी पर दंड का प्रावधान हो।

उन्होंने पैराग्लाइडिंग, स्काईडाइविंग और हॉट एयर बैलूनिंग पायलटों के लिए अनिवार्य राष्ट्रीय प्रमाणन और लाइसेंसिंग ढांचे की स्थापना की मांग की, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों से जुड़ा हो और समय-समय पर री-सर्टिफिकेशन सुनिश्चित करे।

तकनीकी पक्ष पर उन्होंने सभी सोलो पायलटों, टेंडेम फ्लाइट्स और हॉट एयर बैलूनों के लिए GAGAN-संगत GNSS ट्रैकर और इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर अनिवार्य करने की मांग की, ताकि हिमालयी क्षेत्रों में रीयल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित बचाव कार्य संभव हो सके। इसके साथ ही सभी एयर स्पोर्ट्स इवेंट्स के लिए रीयल-टाइम मौसम निगरानी और अनिवार्य NOTAM (Notice to Airmen) सलाह जारी करने तथा असुरक्षित मौसम में उड़ानों पर रोक लगाने की व्यवस्था की मांग भी रखी।

उन्होंने एक राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग स्कूल की स्थापना के लिए केंद्र सरकार से फंडिंग की मांग की, ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित पायलट और प्रशिक्षक तैयार किए जा सकें और हिमाचल प्रदेश की वैश्विक प्रतियोगिताएं आयोजित करने की क्षमता बढ़ सके।

इसके अतिरिक्त उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्रालय या एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अंतर्गत एक समर्पित नेशनल एयर स्पोर्ट्स सेफ्टी एंड ट्रैकिंग सेल बनाने का प्रस्ताव रखा, जो रीयल-टाइम फ्लाइट मॉनिटरिंग, राज्य आपदा प्रतिक्रिया टीमों के साथ समन्वय और सुरक्षा उपकरणों के प्रमाणन का कार्य करे।

उन्होंने सभी एयर स्पोर्ट्स दुर्घटनाओं की अनिवार्य स्वतंत्र जांच, घायलों के उपचार और मृतकों के परिजनों के लिए न्यूनतम मुआवजा एवं पुनर्वास प्रोटोकॉल लागू करने की भी मांग की।

अंत में उन्होंने मंत्रालय से इस मुद्दे को प्राथमिकता देने, हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने और एडवेंचर एयर स्पोर्ट्स में GAGAN एकीकरण के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की अपील की, जिसे उन्होंने सार्वजनिक सुरक्षा और भारत में सस्टेनेबल एडवेंचर टूरिज्म के लिए गेम-चेंजर बताया।

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