
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
12 फरवरी 2023
हिमाचल प्रदेश में शिटाके मशरूम को अप्रैल के बाद व्यावसायिक रूप देने की तैयारी की जा रही है। कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के शिटाके मशरूम प्रशिक्षण केंद्र में इसका ट्रायल किया गया, जो सफल रहा है। इस ट्रायल में शिटाके मशरूम की उच्च गुणवत्ता की पैदावार प्राप्त हुई है। केंद्र में इसकी पैदावार करने के लिए ब्लॉक बनाए गए हैं। एक ब्लॉक का वजन ढाई किलो है। एक ब्लॉक को तैयार करने के लिए 90 से 100 दिन का समय लग रहा है। इसमें पॉपुलर की लकड़ी और बुरादे का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब एक ब्लॉक में कितना उत्पादन हो सकता है और उसे कैसे बढ़ाया जा सकता है, इस पर कार्य किया जा रहा है। उच्च गुणवत्ता पूर्ण शिटाके मशरूम पहली बार हिमाचल में पैदा की जा रही है। इसके उत्पादन के लिए 16 से 18 डिग्री तापमान तथा 80 फीसदी आर्द्रता की आवश्यकता होती है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद खुंब निदेशालय (डीएमआर) से बीज (स्पौन) लिया जा रहा है। यह शिटाके मशरूम पूरी तरह ऑगेनिक है। वहीं, उत्पादन को पॉलीप्रोपाइन बैगों में पैक किया जाएगा। अब विशेषज्ञ यह शोध कर रहे हैं कितने तापमान पर अधिक उत्पादन होगा और कितने अनुपात में लकड़ी व बुरादे का इस्तेमाल किया जाए। जब यह तय हो जाएगा, तब किसानों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद किसानों को भी यह बैग ट्रायल के लिए दिया जाएगा। शिटाके मशरूम के उत्पादन के लिए वैज्ञानिक डॉ. दीपिका सूद, विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. सपन ठाकुर, डॉ. नागेंद्र नाग ने जापान में जाकर प्रशिक्षण प्राप्त किया है। यह प्रोजेक्ट जाइका हमीरपुर के तहत संचालित किया जा रहा है। इस बारे में जाइका हमीरपुर के निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने कहा कि शिटाके मशरूम का ट्रायल किया गया है। उच्च गुणवत्तापूर्ण पैदावार प्राप्त हुई है। इसके लिए विशेषज्ञों को जापान में प्रशिक्षण दिया गया है। जल्द ही इस खेती को व्यावसायिक रूप दिया जाएगा।
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