
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार कर्मचारी पेंशन, पारिवारिक पेंशन, पेंशन और ग्रेच्युटी योजना को निरस्त करने में सक्षम है। शीर्ष अदालत के इस फैसले से हिमाचल के निगमों-बोर्डों के करीब 7 हजार कर्मियों को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत की तीन जजों की बेंच ने बीते दिन एक याचिका खारिज कर दी, जिसमें राज्य सरकार पर 11,500 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय असर पड़ने की बात कही गई थी।
हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के सेवानिवृत्त कर्मियों ने यह याचिका दायर की थी। पीठ ने कहा कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ ने माना था कि सरकार ने पूर्ववर्ती पेंशन योजना के तहत पेंशन पाने के अधिकार में कटौती नहीं की है, लेकिन उन्हें इस योजना के तहत अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेंगे। पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत लिए निर्णय को अनुच्छेद 32 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती है। यह भी कहा कि शिकायत के लिए उचित रास्ता समीक्षा या उपचारात्मक याचिका है, न कि नई रिट।
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