
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
2 सितंबर 2023

सूरज की सतह पर छिपे हुए राज को खंगालने के लिए श्रीहरिकोटा से आदित्य एल वन रवाना हो गया। तकरीबन 4 महीने के बाद सूरज के जिस लैंग्रेजियन पॉइंट में आदित्य एल वन पहुंचेगा वहां से अगले तकरीबन 25 साल तक यह हमारे वैज्ञानिकों को सूचनाओं भेजता रहेगा। हालांकि आदित्य एल वन की उम्र तो वैसे पांच साल की ही है। लेकिन जिन तकनीकियों के इस्तेमाल से उसको भेजा गया है वह कम से कम 25 साल से ज्यादा तक सूर्य के से रहस्यों को खंगालता रहेगा। वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिकों का कहना है कि कई सालों तक अब सूरज के तापमान में होने वाले फेरबदल और धरती पर होने वाले उसके असर को समझना बहुत आसान हो जाएगा। वही इसरो के इस महत्वपूर्ण मिशन पर अमेरिका यूरोप और चीन की स्पेस एजेंसियों की निगाहें लगी हुई है
वरिष्ठ खगोल विज्ञानी डॉ संजीव सहजपाल बताते हैं कि भारत का यह मिशन नासा और ईसा(यूरोपीय स्पेस एजेंसी) से कई गुना बेहतर और बड़ा है। उनका कहना है कि 1995 में नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी की ओर से भेजे गए सोहो(एसओएचओ) मिशन को महत्व 5 साल के लिए ही अंतरिक्ष में भेजा गया था। यह मिशन आज भी तकरीबन 28 साल से लगातार सूरज के लैंग्रेजियन पॉइंट से पूरी जानकारियां भेजता रहता है। वह कहते हैं कि सोहो मिशन के 28 साल बाद जब इसरो ने अपना आदित्य एल वन सूरज के राज को समझने के लिए रवाना हुआ है तो वह उससे कई गुना ज्यादा एडवांस तकनीकियों से भरा हुआ है। प्रोफेसर सहजपाल कहते हैं कि जिस तरह से इस मिशन को डिजाइन किया गया है उसे अनुमान यही लगाया जा रहा है कि अगले 25 साल से ज्यादा के वक्त तक यह हमारे वैज्ञानिकों को सूरज की सतह पर उत्पन्न होने वाली ऊर्जा और उसके पड़ने वाले असर का अध्ययन करने में बहुत सहायक होगा।
वह कहते हैं जिस जगह पर जाकर इसरो का यह मिशन काम करेगा वहां पर सूरज और पृथ्वी की ग्रेविटेशन अट्रैक्शन जीरो रह जाती है। इसीलिए इस लैंग्रेजियन पॉइंट को सूरज के रहस्य को समझने के लिए चुना गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सूरज का तापमान सूरज की सतह से लेकर उसके तमाम ग्रेविटेशनल पॉइंट तक अलग-अलग तरह का होता है। इसका अध्ययन करके इस बात की भी पड़ताल की जाएगी की धरती के किस हिस्से में सूरज असर किस तरह पड़ रहा है। इस दौरान शोध के दायरे में सूरज के अलग-अलग हिस्सों में उत्पन्न होने वाली ऊर्जा भी रहेगी।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक सूर्य के तापमान के बारे में जितनी भी जानकारियां आई हैं वह सोहो मिशन के माध्यम से ही ज्यादातर सामने आई हैं। अब सूरज की सतह और वहां से निकलने वाली किरणों समेत उसके तापमान और मैग्नेटिक फील्ड की पूरी जानकारी मिशन आदित्य एल वन के माध्यम से पता चलेगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मिशन के माध्यम से सबसे महत्वपूर्ण जानकारी और शोध धरती पर पड़ने वाले सूरज की किरणों और उसकी वजह से पड़ने वाले क्लाइमेट के असर की मिलेगी। वह कहते हैं कि अभी अंतरिक्ष में 8000 से ज्यादा सैटेलाइट हर वक्त घूमते रहते हैं। सूरज की किरणों से इन सेटेलाइट पर पड़ने वाले असर को भी इस मिशन के माध्यम से मॉनिटर किया जाएगा। इसके अलावा मिशन आदित्य भविष्य में अंतरिक्ष में होने वाली तमाम बड़ी गतिविधियों और स्थापित किए जाने वाले अन्य सैटेलाइट समेत स्पेस स्टेशंस को मजबूती के साथ स्थापित करने में बड़ी भूमिका अदा करने वाला है। क्योंकि मिशन आदित्य के माध्यम से मिलने वाली सूर्य की ऊर्जा के रहस्यों को जानकर ही अंतरिक्ष में भविष्य की दुनिया तैयार की जाएगी।
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