#आज शाम तीन बजे  होगा गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव का एलान*

 #खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

14 अक्टूबर 2022

 #आज शाम तीन बजे  होगा गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव का एलान*

पिछली बार हिमाचल प्रदेश में नौ नवंबर को एक ही चरण में चुनाव हुआ था, जबकि गुजरात में नौ और 14 दिसंबर को दो चरणों में वोटिंग हुई थी। 18 दिसंबर को दोनों राज्यों के चुनाव नतीजे आए थे।

गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव 2022

आज शाम तीन बजे चुनाव आयोग की तरफ से गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव का एलान हो सकता है। चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसमें दोनों राज्यों के चुनाव का एलान भी हो जाएगा। अभी दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है। पिछली बार हिमाचल प्रदेश में नौ नवंबर को एक ही चरण में चुनाव हुआ था, जबकि गुजरात में नौ और 14 दिसंबर को दो चरणों में वोटिंग हुई थी। 18 दिसंबर को दोनों राज्यों के चुनाव नतीजे आए थे।

ऐसे में आइए जानते हैं कि दोनों राज्यों में पांच साल के अंदर क्या-क्या बदला? मौजूदा राजनीतिक स्थिति क्या है? दोनों राज्यों में मुद्दे क्या हैं? कौन सा दल किसे चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा जा रहा है? मुकाबला किन-किन पार्टियों के बीच है? 

पहले जानिए मौजूदा राजनीतिक स्थिति क्या है? 

हिमाचल प्रदेश : यहां कुल 68 विधानसभा सीटें हैं। 2017 में चुनाव के दौरान भाजपा 44 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस को 21, सीपीआई (एम) को एक सीट मिली थी। दो निर्दलीय प्रत्याशी भी विधायक बने थे, जिन्होंने भाजपा सरकार को समर्थन दे दिया था। बाद में कुछ सदस्यों के निधन के बाद उपचुनाव भी हुए, जिसके बाद सियासी समीकरण में थोड़ा बदलाव हुआ। अभी भाजपा के 43 विधायक हैं और दो निर्दलीयों का भी सरकार को समर्थन है। इसके अलावा कांग्रेस के पास 22 और सीपीआई (एम) के पास एक सीट है। भाजपा के जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री हैं।

गुजरात : राज्य में कुल 182 विधानसभा सीटें हैं। 2017 चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। भाजपा ने 99 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस को 77 पर सफलता मिली थी। तीन निर्दलीय, दो भारतीय ट्राइबल पार्टी और एक एनसीपी के प्रत्याशी ने भी जीत हासिल की थी। राजनीतिक बदलाव के चलते बीच में कुछ सीटों पर उपचुनाव भी हुए। जिसके बाद अब विधानसभा में सदस्यों की स्थिति बदल गई है। इस वक्त गुजरात विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, भाजपा के 111 सदस्य हैं। कांग्रेस के पास 62, बीटीपी के दो, एनसीपी के एक और एक निर्दलीय विधायक हैं। चुनाव के बाद विजय रुपाणी को मुख्यमंत्री  राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। 2021 तक वह सीएम रहे। बाद में उनकी जगह भूपेंद्र भाई पटेल ने 13 सितंबर 2021 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

दोनों राज्यों में मुद्दे क्या-क्या हैं?
दोनों राज्यों के लिए कुछ मुद्दे कॉमन हैं, जिसे लगातार विपक्षी दल उठा रहे हैं। पहला मुद्दा किसानों का है। विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए जोरशोर से ये मुद्दा उठाया है। आरोप है कि मौजूदा केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। इसके चलते किसान आत्महत्या कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर किसान बर्बाद हो गए। विपक्ष का आरोप है कि सरकार बड़े-बड़े उद्योगपतियों का कर्ज माफ कर देती है, लेकिन किसानों का नहीं। इसके अलावा महंगाई, बेरोजगारी का मुद्दा भी दोनों राज्यों में विपक्ष उठा रहा है। वहीं, सत्तापक्ष विकास का मुद्दा उठा रहा है।

अभी से इन मुद्दों को विपक्षी दल जोरशोर से उठा रहे हैं। गुजरात में व्यापारियों और कारोबारियों की समस्याओं को लेकर भी विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। वहीं, दूसरी ओर भाजपा ने विकास के साथ राष्ट्र सुरक्षा, आम लोगों की सहूलियत, गरीबों-किसानों को मजबूत बनाने के मुद्दे पर चुनावी मैदान पर उतरने का फैसला लिया है। भाजपा हर जगह अपने विकास कार्यों की गिनती करा रही है। एम्स, आईआईटी जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को बनाने की बात कह रही है। हाईवे, पुल, अंडर ब्रिज, टनल, मेट्रो जैसे अन्य कार्यों को बताकर लोगों से भाजपा के पक्ष में वोट करने की अपील की जा रही है। पिछले कुछ दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों राज्यों में कई योजनाओं को उद्धाघाटन और शिलान्यास किया है।

किस चेहरे पर चुनाव लड़ रहे राजनीतिक दल? 

हिमाचल प्रदेश 
यहां भाजपा अपने मौजूदा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के चेहरे पर ही चुनाव लड़ेगी। हालांकि, बड़ा चेहरा पीएम मोदी का ही होगा। जयराम ठाकुर के अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश चंबेल सिंह कश्यप भी आगे हैं। वहीं, कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह की अगुआई में चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। पिछले साल जुलाई में ही वीरभद्र सिंह का निधन हो गया था। इसके बाद कांग्रेस ने उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया था।

वीरभद्र छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री थे। वीरभद्र के परिवार का आज भी हिमाचल में काफी दबदबा है। यही कारण है कि कांग्रेस ने इस बार प्रतिभा सिंह को कमान सौंप दी है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर से प्रियंका गांधी और राहुल गांधी को चेहरा बनाया गया है। आम आदमी पार्टी ने भी पूरी ताकत लगा दी है। प्रदेश अध्यक्ष सुरतीज ठाकुर की अगुआई में आम आदमी पार्टी यहां चुनाव लड़ रही है। हालांकि, यहां भी बड़ा चेहरा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का ही होगा।

गुजरात 
भाजपा मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल की अगुआई में ही चुनाव लड़ेगी। हालांकि, पूरे गुजरात में पीएम नरेंद्र मोदी ही चेहरा होंगे। गुजरात सरकार से लेकर संगठन तक में भूपेंद्र भाई से ज्यादा नरेंद्र मोदी के चेहरे का प्रयोग किया जा रहा है। वहीं, कांग्रेस भी स्थानीय नेताओं की बजाय राष्ट्रीय नेताओं के चेहरे को चुनाव में भुनाने की कोशिश कर रही है। यहां भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को चेहरा बनाया जा रहा है। बात स्थानीय नेताओं की करें तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जगदीश भाई मोतीजी ठाकोर की अगुआई में पार्टी चुनाव लड़ेगी। इनके अलावा छह वर्किंग प्रेसिडेंट भी हैं। इनमें जिग्नेश मेवानी, ललित, ऋत्विक कुमार, अंबरीश, हिम्मत सिंह पटेल और कादिरभाई पीरजादा हैं। इन नेताओं को भी अलग-अलग तरह की जिम्मेदारी दी गई है।

गुजरात में भी इस बार आम आदमी पार्टी काफी कोशिश कर रही है। यहां लगातार आप के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बैठकें और सभा कर रहे हैं। यूं तो आप की तरफ से कोई चेहरा घोषित नहीं किया गया है, लेकिन फिलहाल पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया की अगुआई में ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। गोपाल इटालिया गुजरात के पटेल समाज से आते हैं।

किनके-किनके बीच मुकाबला है

गुजरात 
पिछले 24 साल से गुजरात में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। 12 साल 227 दिन नरेंद्र मोदी खुद मुख्यमंत्री रहे। इनसे पहले केशुभाई पटेल तीन साल 216 दिन मुख्यमंत्री रहे, जबकि मोदी के बाद आनंदीबेन पटेल, विजयभाई रूपाणी भी सीएम रह चुके हैं। अभी भूपेंद्र भाई पटेल मुख्यमंत्री हैं। इन 24 साल में कांग्रेस हमेशा विपक्ष में ही रही है। इस बार आम आदमी पार्टी ने भी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल यहां डेरा डाल चुके हैं। ऐसे में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। हालांकि, जो सर्वे अभी तक सामने आए हैं, उसके अनुसार मुख्य मुकाबला अभी भी भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है।

हिमाचल प्रदेश 
सूबे में शुरू से मुख्य लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रही है। 1983 से अब तक के आंकड़े देखें तो पांच साल भाजपा और पांच साल कांग्रेस ने प्रदेश पर राज किया है। हालांकि, इस बीच लंबे समय तक कांग्रेस के वीरभद्र सिंह ही मुख्यमंत्री रहे। अब उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह कांग्रेस की अगुआई कर रहीं हैं। वहीं, भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अगुआई में पार्टी चुनावी मैदान में है। ऐसे में मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच बताया जा रहा है। आम आदमी पार्टी के आने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

 #खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

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