
शिमला। केंद्र सरकार द्वारा 16 अन्य राज्यों के साथ हिमाचल प्रदेश का राजस्व घाटा अनुदान यानी रेवन्यू डेफेसिट ग्रांट (आरडीजी) बंद करने के खिलाफ राज्य सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएगी। यह सत्र 17 फरवरी, 2026 को होगा। इस बारे में मंगलवार को फाइल विधानसभा सचिवालय से राजभवन भेज दी गई है। राज्यपाल के अनुमति मिलते ही इसे नोटिफाई कर दिया जाएगा। इस विशेष सत्र में राजस्व घाटा अनुदान यानी आरडीजी बंद करने के खिलाफ प्रस्ताव विधानसभा पारित करेगी। इस प्रस्ताव को फिर भारत सरकार को भेजा जाएगा। इससे पहले हालांकि आठ फरवरी को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कैबिनेट की बैठक भी बुला रखी है। कैबिनेट में भी सरकार कुछ बड़े फैसले ले सकती है। अभी बजट सत्र की तारीफ भी राज्य सरकार ने तय नहीं की है। गौरतलब है कि केंद्रीय बजट के दिन ही पहली फरवरी को 16वें वित्तायोग की रिपोर्ट सदन में रखी गई।
इस रिपोर्ट में आरडीजी को बंद करने की सिफारिश की गई है। वित्तायोग ने तर्क दिया है कि 15वें वित्तायोग ने इसलिए आरडीजी को टेंपर किया था, ताकि राज्य इस संकेत को समझें और अपना घाटा कम करने की कोशिश करें, लेकिन बहुत से राज्यों ने ऐसा नहीं किया। इसलिए इसे बंद किया जा रहा है। राज्य सरकार को 14वें वित्तायोग में 40 हजार करोड़ से ज्यादा की आरडीजी पांच साल के लिए मिली थी। 15वें में ये कम होकर 37 हजार करोड़ के आसपास थी, लेकिन 16वें वित्तायोग ने इसे बिल्कुल बंद कर दिया। इस कारण अब राज्य सरकार को सैलरी, पेंशन और लोन रिपेमेंट की प्रतिबध देनदारियों के लिए भी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।





