
शिमला। हिमाचल विधानसभा के हंगामेदार बजट सत्र की शुरुआत सोमवार दोपहर बाद हो रही है। 16वें वित्तायोग की सिफारिश से इस बार के केंद्रीय बजट में हिमाचल का राजस्व घाटा अनुदान यानी आरडीजी बंद होने की लड़ाई अब विधानसभा के भीतर लड़ी जाएगी। इससे पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आरडीजी के बहाने विपक्षी दल भाजपा को विधानसभा से बाहर घेर रहे थे। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने भी इस मुद्दे पर विधानसभा के भीतर ही अपनी बात रखने का ऐलान कर रखा है। इस बार विधानसभा का बजट सत्र कई मायनों में अलग है। यह पहली बार है कि इस सत्र के लिए कोई शेड्यूल जारी नहीं हुआ है और इसे दो ब्रेक में किया जा रहा है। अभी तक सिर्फ तीन दिन सेशन चलाने की नोटिफिकेशन है। पहले दिन सोमवार दोपहर बाद राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल अपना अभिभाषण विधानसभा में रखेंगे। इस अभिभाषण के जरिए जहां राज्य सरकार तीन वर्ष के अपने काम गिनाएगी, वहीं राजस्व घाटा अनुदान बंद करने पर अभिभाषण में भी उल्लेख होगा। बात यहीं नहीं रुकेगी, राज्यपाल अभिभाषण के बाद सदन दोबारा से चलेगा और शोक प्रस्ताव पूर्व विधायक स्व. भगत राम चौहान के लिए रखा जाएगा। इसके बाद पहले ही दिन दो नए विधेयक राज्य सरकार सदन में रखेगी, जिनका मकसद राजभवन को संदेश देना भी है।
सोमवार को पहले दिन बजट सत्र में एक संकल्प प्रस्ताव भी राजस्व घाटा बंद होने पर संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान रख रहे हैं। इस संकल्प प्रस्ताव में कहा गया है कि हिमाचल को संविधान के अनुच्छेद 275 और 280 के तहत राजस्व सहायता अनुदान की राशि पांचवें से 15वें वित्त आयोग तक मिल रही थी, जो 16वें वित्त आयोग की सिफारिश के अनुरूप केंद्र सरकार ने अगले वित्त वर्ष के बजट में बंद कर दी है। इससे प्रदेश में आर्थिक संकट के हालात पैदा हुए हैं। इसके दृष्टिगत यह सदन केंद्र सरकार से पुरजोर सिफारिश करता है कि पूर्व में दी जा रही राजस्व घाटा अनुदान राशि प्रदेश की आर्थिक स्थिति के मद्देनजर पहले के तरह प्रदान की जाए। राज्य सरकार सदन से इस संकल्प प्रस्ताव को पारित कर केंद्र सरकार को भेजना चाहती है। यह विपक्षी दल भाजपा के लिए भी दुविधा की स्थिति है, क्योंकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि संकल्प प्रस्ताव पर क्या रणनीति होगी, इससे पहले मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से विपक्षी दल बहिष्कार कर चुका है। भाजपा नेताओं की अगवाई में प्रधानमंत्री के पास जाने का ऑफर मुख्यमंत्री दे चुके हैं और इसका जवाब भी अभी भाजपा ने आधिकारिक तौर पर नहीं दिया है। अब सदन के भीतर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर इन सवालों का जवाब देंगे।
राजभवन के लौटाए दो विधेयक सदन में लाएगी सरकार
पिछले विधानसभा सत्र में राज्य सरकार ने दो बिल पारित करवाए थे। इसमें हिमाचल प्रदेश नगर निगम संशोधन विधेयक के जरिए नगर निगम मेयर के कार्यकाल के रोस्टर को अढ़ाई साल से बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया था, लेकिन राजभवन से इसे मंजूरी नहीं मिली। दूसरा विधेयक रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी में अध्यक्ष की नियुक्ति की चयन समिति से चीफ जस्टिस को हटाकर मुख्य सचिव को शामिल करने का था। इसे भी राजभवन ने मंजूरी नहीं दी थी। दोनों बिल पुनर्विचार के लिए सरकार को लौटा दिए गए थे। अब सरकार ने ये दोनों बिल बजट सत्र के पहले ही दिन सदन में रखने हैं। यदि सरकार इन्हें दोबारा पारित कर राजभवन भेजती है, तो इन्हें लौटाने का विकल्प नहीं रहेगा।





