
हिमाचल प्रदेश में पंचायतों में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। नवविवाहित जोड़ों से विवाह पंजीकरण शुल्क की वसूली तो की गई, लेकिन इसे सरकारी खाते में जमा नहीं करवाया गया। बगैर टेंडर के लाखों रुपये की सामग्री की खरीद कर दी गई। पंचायतों की ओर से गृहकर की वसूली नहीं की गई। जरूरत से ज्यादा बैंक खाते खोले गए। उनका हिसाब-किताब नहीं रखा गया। बगैर उचित बिलों के लाखों रुपये के भुगतान कर दिए गए।
यह खुलासा राज्य लेखा परीक्षा विभाग की ओर से तैयार ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। पंचायतों ने नियमों को ताक पर रखकर कार्य किए। 1 अप्रैल, 2024 से 31 मार्च 2025 की अवधि में राज्य लेखा परीक्षा विभाग ने यह ऑडिट रिपोर्ट तैयार की है। यह ऑडिट रिपोर्ट स्थानीय लेखा परीक्षा विभाग के उपनिदेशक सतपाल सिंह की निगरानी में ऑडिट टीम ने तैयार की है। हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज नियम के तहत पंचायत को दिए गए अनुदानों का उपयोग उसी उद्देश्य से किया जा सकता है, जिसके लिए वह मंजूर किए गए हैं। जिस अधिकारी ने इन्हें मंजूर किया हो, उन्हें उपयोगिता प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है। लेकिन कई कार्यों के उपयोगिता प्रमाण पत्र पेश नहीं किए गए।
जिला बिलासपुर की छकोह पंचायत ने राजस्व गृहकर के 67,600 रुपये की वसूली नहीं की। विवाह पंजीकरण शुल्क की राशि के 3,000 रुपये सरकारी कोष में जमा नहीं किए। प्रति विवाह पंजीकरण शुल्क 200 रुपये और देरी पर दोगुनी दर से वसूला जाना होता है। वर्ष 2024-25 में यह वसूली की गई, लेकिन यह पैसा सरकारी कोष में जमा नहीं करवाया गया है। इसके अलावा औपचारिकताओं को पूरा किए बिना स्टॉक और स्टोर के लिए खरीद की गई। 2 लाख 50 हजार 103 रुपये की खरीद बगैर टेंडर के ही कर दी। इसके अलावा 50 हजार से ज्यादा की खरीद बिना व्यापक प्रसार के ही की गई। लेखा परीक्षा विभाग को सचिव ने उत्तर दिया कि भविष्य में इन अनियमितताओं को नहीं दोहराया जाएगा, मगर लेखा परीक्षा विभाग ने इसे संतोषजनक नहीं पाया। खनन सामग्री के लिए ट्रांजिट फार्म लिए बिना ही 3.75 लाख का अनियमित भुगतान कर दिया। बगैर उचित बिल के 1.79 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
जिला ऊना की अजौली पंचायत में भी अनुदानों के उपयोगिता प्रमाण पत्र पेश नहीं किए गए। पंचायत राजस्व की 30,700 रुपये की वसूली नहीं की गई। विवाह पंजीकरण शुल्क की राशि के 5000 रुपये सरकारी कोष में जमा नहीं किए। खनन सामग्री के लिए भी इस पंचायत ने भी 23 हजार रुपये का ट्रांजिट पास फार्म प्राप्त किए बिना अनियमित भुगतान किया। जिला सिरमौर की सताहन पंचायत में रोकड़ बही और बैंक खातों की बकाया राशि में 11 लाख रुपये का अंतर पाया गया। अनुदानों के उपयोगिता के प्रमाण पत्र भी इस पंचायत ने पेश नहीं किए। अनुदान राशि के 23.59 लाख रुपये का उपयोग नहीं किया गया। पंचायत का गृहकर और संपत्ति कर के हजारों नहीं वसूले गए। विवाह पंजीकरण शुल्क की राशि भी सरकारी कोष में जमा नहीं की। एक ही क्रमांक संख्या की 6 रसीद बुकें प्रयोग में लाई गईं। 3.44 लाख की खरीद के ट्रांजिट पास फार्म एक्स प्रस्तुत नहीं किए गए।





