
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
10 फरवरी 2024
डॉ. यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के पादप रोग विज्ञान विभाग द्वारा ‘अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना’ के तहत मशरूम की खेती पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में शिमला, सोलन, सिरमौर, बिलासपुर, हमीरपुर, लाहौल और स्पीति और चंबा जिलों के 20 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मशरूम इकाई स्थापित करने, बटन मशरूम, ऑयस्टर मशरूम, शिटाके मशरूम, लायनस मेन मशरूम और गैनोडर्मा मशरूम की खेती तकनीक के साथ-साथ रोग और कीट प्रबंधन और विपणन के विभिन्न पहलुओं से अवगत करवाया गया। किसानों को खाद तैयार करने, सब्सट्रेट तैयार करने, स्पॉनिंग, ऑयस्टर और शिटाके के बैग भरने, स्पॉनिंग तैयार करने पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विशेषज्ञों के साथ-साथ मशरूम अनुसंधान निदेशालय, सोलन जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों ने अलग अलग विषयों पर व्याख्यान दिए। प्रतिभागियों को मशरूम अनुसंधान निदेशालय के एक्सपोजर विजिट पर भी ले जाया गया।
समापन सत्र के दौरान, प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. धर्मेश गुप्ता ने मशरूम उत्पादकों के निकट भविष्य में प्रशिक्षण कार्यक्रम के महत्व और दायरे के बारे में जानकारी दी, जबकि पादप रोग विज्ञान विभाग के हैड डॉ. सतीश शर्मा ने दैनिक जीवन में मशरूम के महत्व पर बात की। अनुसंधान निदेशक डॉ. संजीव चौहान ने औषधीय मशरूम पर विशेष जोर देते हुए मशरूम की खेती के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवा प्रशिक्षुओं से इस क्षेत्र में अपना उद्यम स्थापित करने का आग्रह भी किया। इस अवसर पर डॉ. चौहान ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किये।
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