कुनिहार : अनादि कालीन शिव तांडव गुफा में शिव महापुराण कथा का आठवाँ दिवस भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न

🛕 धार्मिक समाचार |
कुनिहार की पावन एवं प्राचीन धरा पर स्थित अनादि कालीन शिव तांडव गुफा इन दिनों दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठी है। यहाँ आयोजित भव्य शिव महापुराण कथा के आठवें दिवस का कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और भक्तिमय वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर स्वयं को धन्य अनुभव किया। गुफा परिसर “हर हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से निरंतर गुंजायमान रहा, जिससे संपूर्ण वातावरण शिवमय हो उठा।

कथा व्यास पूज्य आचार्य बलवंत शांडिल्य ने अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचन में भगवान शिव-पार्वती के तेजस्वी पुत्र कार्तिकेय की दिव्य उत्पत्ति का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। आचार्य ने बताया कि जब अत्याचारी दैत्य तारकासुर के आतंक से समस्त देवता त्रस्त हो गए और धर्म संकट में पड़ गया, तब ब्रह्मा के वरदान के कारण उसका वध केवल शिवपुत्र द्वारा ही संभव था। देवताओं की प्रार्थना और लोककल्याण की भावना से भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य तेज से एक अद्भुत बालक प्रकट हुए।

उस दिव्य बालक का पालन-पोषण छह कृतिकाओं द्वारा किया गया, इसी कारण वे “कार्तिकेय” कहलाए। आगे चलकर अपनी अद्वितीय वीरता, तेज, पराक्रम और दिव्य सामर्थ्य के बल पर उन्होंने देवताओं का नेतृत्व संभाला और देवसेना के सेनापति नियुक्त हुए। कथा सुनते ही पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति भाव से अभिभूत हो उठे और “हर हर महादेव” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

इसके उपरांत आचार्य ने गणपति महाराज की अद्भुत जन्म कथा का अत्यंत रोचक एवं भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने अपने उबटन के लेप से एक दिव्य बालक की रचना की और उसे द्वार पर प्रहरी बनाकर स्वयं स्नान हेतु चली गईं। उसी समय भगवान शिव वहाँ पधारे, किंतु बालक ने आज्ञा का पालन करते हुए उन्हें भीतर प्रवेश करने से रोक दिया। शिवगणों और बालक के मध्य हुए संघर्ष में बालक का शीश कट गया।

जब माता पार्वती को यह ज्ञात हुआ तो उनका करुण विलाप संपूर्ण सृष्टि को व्याकुल कर गया। उनकी वेदना शांत करने हेतु भगवान शिव ने उत्तर दिशा में प्रथम जीवित प्राणी गज का शीश लाकर बालक के धड़ से जोड़ दिया और उसे पुनर्जीवित कर “गणों के अधिपति” तथा “प्रथम पूज्य” गणेश का पद प्रदान किया। आचार्य ने बताया कि यह कथा हमें आज्ञापालन, कर्तव्यनिष्ठा, मातृ-पितृ सम्मान और अटूट श्रद्धा का अमूल्य संदेश देती है।

पूरे प्रवचन के दौरान श्रद्धालु भक्ति-रस में सराबोर होकर कथा का श्रवण करते रहे। भजन-कीर्तन और जयघोषों से गुफा परिसर पूर्णतः शिवमय हो गया। आरती के समय दीपों की पंक्तियों से सजा वातावरण अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान कर रहा था।

आयोजन समिति के अनुसार कथा के आगामी दिवसों में भी इसी प्रकार दिव्य प्रवचन, विशेष भजन संध्या एवं महाआरती का आयोजन किया जाएगा। समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।

हर हर महादेव! 🙏

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