
कुनिहार,
— बी.एल. सेंट्रल पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कुनिहार में आयोजित तीन दिवसीय शिक्षण सेमिनार के दूसरे दिन का कार्यक्रम शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक रहा। इस दौरान शिक्षकों को आध्यात्मिक जागरूकता, सकारात्मक सोच, नई शिक्षा नीति और एक आदर्श शिक्षक की भूमिका पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मंच संचालिका शिवानी शर्मा ने की और सभी अतिथियों व शिक्षकों का स्वागत किया। विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए ऐसे आयोजनों को शिक्षकों के समग्र विकास के लिए जरूरी बताया।
प्रातःकालीन सत्र में ब्रह्म कुमारी सुमन दीदी ने शिक्षकों को आध्यात्मिक ज्ञान, सकारात्मक चिंतन और ध्यान (मेडिटेशन) के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का मन शांत और केंद्रित होना चाहिए, तभी वह विद्यार्थियों को सही दिशा दे सकता है। इस अवसर पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कुनिहार के प्रधानाचार्य हेम राज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने भी सकारात्मक सोच व आध्यात्मिकता पर अपने विचार साझा किए।
सायंकालीन सत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित भूपेंद्र गुप्ता, अतिरिक्त निदेशक, उच्चतर शिक्षा विभाग सोलन ने मुख्य वक्ता के रूप में शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने नई शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बदलते समय के साथ शिक्षण पद्धतियों में नवाचार आवश्यक है। उन्होंने शिक्षक की भूमिका को समाज, अभिभावकों और विद्यार्थियों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा और मुख्याध्यापिका सुषमा शर्मा ने सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, हर वर्ष नए शैक्षणिक सत्र से पहले इस तरह के सेमिनार आयोजित किए जाते हैं, जिससे शिक्षकों की कार्यकुशलता और गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो सके।
सेमिनार में सभी शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। यह आयोजन शिक्षकों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक बल्कि प्रेरणादायक भी साबित हुआ।





