कुनिहार में शिव महापुराण कथा का तृतीय दिवस श्रद्धा और भक्ति से सराबोर।

कुनिहार:-
कुनिहार स्थित अनादिकालीन शिव तांडव गुफा में आयोजित शिव महापुराण कथा के तीसरे दिवस पर कथा वाचक आचार्य बलवंत शांडिल ने शिव पंचाक्षर मंत्र “ॐ नमः शिवाय” की उत्पत्ति की भावपूर्ण कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान पूरा पंडाल हर हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
भजनों की मधुर धुनों पर श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूम उठे और वातावरण पूर्ण रूप से शिवमय हो गया।

तीसरे दिवस की कथा में भगवान शिव की करुणा, भक्ति और धर्म की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा वाचक ने बताया कि भगवान शिव जितने भोले हैं, उतने ही दयालु भी हैं। सच्चे मन से की गई प्रार्थना को वे अवश्य स्वीकार करते हैं, चाहे भक्त कितना ही साधारण क्यों न हो।

कथा के दौरान शिव–पार्वती संवाद का प्रसंग सुनाया गया, जिसमें माता पार्वती भगवान शिव से पूछती हैं कि कलियुग में मनुष्य को मोक्ष कैसे प्राप्त होगा। तब भगवान शिव बताते हैं कि भक्ति, सत्य और सेवा ही वह मार्ग है जिससे मनुष्य जीवन सफल हो सकता है। शिव नाम का स्मरण ही सबसे बड़ा मंत्र है।

कथा वाचक ने कहा कि जो व्यक्ति दूसरों की सहायता करता है, दीन-दुखियों की सेवा करता है और मन, वचन, कर्म से पवित्र रहता है, उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है।

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