कुल्लू-देव सदन कुल्लू में 28वीं सूत्रधार होली होगी 22 फरवरी को आयोजित

कुल्लू-
सूत्रधार कला संगम कुल्लू की कार्यकारिणी बैठक सोमवार को सूत्रधार भवन स्थित कार्यालय में संस्था अध्यक्ष दिनेश सेन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई । बैठक में संस्था की वार्षिक गतिविधियों एवं आगामी कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई ।
बैठक में जानकारी देते हुए अध्यक्ष दिनेश सेन ने बताया कि सूत्रधार कला संगम कुल्लू अपने स्थापना वर्ष 1977 से निरंतर गीत-संगीत, लोककला, नाटक, आधुनिक नृत्य तथा समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाता आ रहा है । इसी सांस्कृतिक परम्परा को आगे बढ़ाते हुए संस्था पिछले 27 वर्षों से कुल्लू की समृद्ध पारम्परिक होली गायन पर आधारित कार्यक्रम “होली संध्या” का आयोजन करती आ रही है । उन्होंने बताया कि इस वर्ष संस्था द्वारा 28वीं सूत्रधार होली संध्या का आयोजन 22 फरवरी 2026, रविवार को देव सदन कुल्लू के सभागार में सायं 07:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक किया जाएगा । कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध लेखक, गायक एवं संगीतकार स्वर्गीय श्री राम कुमार कपूर की रचनाओं के साथ-साथ कुल्लू जनपद में पीढ़ियों से गाई जा रही लोकप्रचलित एवं पारम्परिक होली गीतों की मधुर प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी तथा साथ ही इस कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से होली से सम्बन्धित नृत्य प्रस्तुतियाँ भी शामिल की जाएंगी । अध्यक्ष दिनेश सेन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम सम्पूर्ण रूप से निःशुल्क रखा गया है, ताकि घाटी के हर कला-प्रेमी, बुज़ुर्ग, युवा व बच्चे अपनी लोकसंस्कृति की इस रंगीन छटा का आनंद उठा सकें ।
बैठक में संस्था के संरक्षक मण्डल सदस्य युवराज बौध व अध्यक्ष दिनेश सेन सहित उपाध्यक्ष कंवर वीरेंद्र सिंह, महासचिव अतुल गुप्ता, वित्त सचिव जोगेंद्र ठाकुर, भण्डार प्रभारी तिलक राज चौधरी, सचिव यशोदा शर्मा, सुदेश कुमार व हितेश कुमार गोगी, प्रचार-प्रसार प्रभारी सुंदर श्याम, सह-प्रचार प्रभारी धर्मेन्द्र शर्मा, लोक नृत्य प्रभारी सीमा शर्मा, कार्यकारिणी सदस्य भारत भूषण आचार्य, सुबोध सूद व कैप्टन रणधीर सल्हुरिया, प्राचार्य संगीत अकादमी पं. विद्या सागर, आमंत्रित सदस्य जीवन बुडाल, सनी व संजय पुजारी तथा प्रबन्धक उत्तम चन्द उपस्थित रहे ।
वहीं मथुरा एवं वृज की तर्ज पर रघुनाथ जी की नगरी कुल्लू में वैराग्य समुदाय के साथ-साथ आम जनमानस द्वारा होली गायन एवं होली उत्सव मनाने की परम्परा 17वीं शताब्दी से चली आ रही है । समय परिवर्तन के साथ ये समृद्ध परम्पराएँ धीरे-धीरे क्षीण होती जा रही हैं । ऐसे में सूत्रधार कला संगम कुल्लू द्वारा “होली संध्या” के माध्यम से पारम्परिक होली गायन एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है । साथ ही बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सूत्रधार कला संगम कुल्लू द्वारा शीघ्र ही कुल्लू जनपद के पौराणिक एवं लोकप्रचलित गीतों पर आधारित एक विशेष संगीत एलबम का निर्माण किया जायेगा । इस एलबम के माध्यम से कुल्लू की लोकधारा, पारम्परिक सुरों एवं पौराणिक गीतों को संजोकर भावी पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा । इस महत्वपूर्ण कार्य के सफल क्रियान्वयन हेतु सुंदर श्याम, पं० विद्या सागर, धर्मेन्द्र शर्मा, सीमा शर्मा, जीवन बुडाल, सनी एवं संजय को विभिन्न दायित्व सौंपे गए ।

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