# कोर्ट का निर्णय लागू न करने पर सचिव शिक्षा का वेतन रोका, तीन वर्ष पहले सुनाया था फैसला |

ख़बर अभी अभी ब्यूरो सोलन

 5 अगस्त 2023

himachal high court order Stop Salary to education secretary himachal pradesh

तीन वर्ष पूर्व अदालत ने सरकार की ओर से 95 फीसदी वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बकाया वेतन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवा लाभ के लिए हकदार ठहराया था।  लेकिन अभी तक याचिकाकर्ता को इस निर्णय के मुताबिक कोई सेवा लाभ नहीं दिया गया।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालती निर्णय को लागू न करने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने तीन वर्ष पहले सुनाए गए निर्णय को लागू करने में असफल रहे शिक्षा सचिव की वेतन अदायगी पर रोक लगा दी है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि शिक्षा सचिव की इस कार्यप्रणाली के लिए कड़े आदेश पारित करने के लिए अदालत मजबूर है। हालांकि कारावास के आदेश पारित करने के बजाए अतिरिक्त महाधिवक्ता के आग्रह पर नरम रुख अपनाते हुए सिर्फ वेतन की अदायगी पर रोक लगाई जाती है।

अदालत ने इस आदेश की प्रति मुख्य सचिव को अनुपालाना के लिए भेजने के आदेश दिए हैं। मामले की सुनवाई 9 अगस्त को निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता नील कमल सिंह ने हाईकोर्ट की ओर से उसके पक्ष में तीन साल पहले सुनाए गए निर्णय को लागू करने के लिए याचिका दायर की थी।

अदालत ने पाया कि 7 जनवरी 2020 को खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया था। इसे लागू करने के लिए अदालत ने कई बार शिक्षा सचिव को आदेश पारित किए थे। 31 मई 2023 को अदालत ने इस याचिका का निपटारा करते हुए 19 जुलाई 2023 के लिए अनुपालना रिपोर्ट तलब की थी।

इस दिन भी अदालत के निर्णय को लागू करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई। अदालत ने फिर से  शिक्षा सचिव को एक और मौका दिया। इस बार भी अदालत के निर्णय को लागू नहीं किया गया और अदालत ने उनके वेतन रोकने के आदेश पारित किए।

तीन वर्ष पूर्व अदालत ने सरकार की ओर से 95 फीसदी वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बकाया वेतन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवा लाभ के लिए हकदार ठहराया था।  लेकिन अभी तक याचिकाकर्ता को इस निर्णय के मुताबिक कोई सेवा लाभ नहीं दिया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह आदेश पारित किए। 

Share the news