कौन सा सैटेलाइट किस जमीन के लिए कारगर, अब होगा तय

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

9 जुलाई 2023

अलग तरह की भूमि, मौसम और ऊंचाई के लिए बेहतर सैटेलाइट और तस्वीर के लिए तकनीक विकसित की जा रही है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधार्थी इस पर काम कर रहे हैं। शोधार्थियों का दावा है कि विश्व में पहली बार इस तरह की तकनीक विकसित की जा रही है। तकनीक विकसित होने पर अलग-अलग भूमि, मौसम व ऊंचाई के लिए बेहतर सैटेलाइट का चयन करते हुए बेहतर परिणाम मिल सकेंगे। एस मैप सैटेलाइट से कृषि भूमि की बेहतर तस्वीर सामने आई है।

यह शोध कार्य बल्ह क्षेत्र में चल रहा है। वर्तमान में हर तरह की भूमि यानी कृषि, वन, घास, हर तरह के मौसम यानी सर्दी, गर्मी, बरसात व ऊंचाई के लिए एक तरह के सैटेलाइट से काम हो रहा है। जबकि वास्तविकता में धरातल में यह सब अलग-अलग हैं। शोध में यह स्पष्टता लाई जा रही है कि कौन सैटेलाइट कौन सी जगह काम करेगा, जिससे बेहतर परिणाम के साथ बेहतर तस्वीर मिल सकें।

यह शोध कार्य वर्ष 2021 से शुरू किया गया है और दिसंबर 2023 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस शोध में स्पेशियल रेजोलेशन का स्केल डाउन करके फील्ड स्तर पर बराबर लाया जा रहा है। पता लगाया जा रहा है कि कौन सी सैटेलाइट किस मौसम, किस भूमि पर बेहतर काम करेगा। उसे उस भूमि के लिए इस्तेमाल में लाया जाएगा। फील्ड पर किए गए काम से इसकी तुलना की जा रही है। गणित के फार्मूले अपनाते हुए तकनीक विकसित की जाएगी।

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