
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
19 जून 2023

हिमाचल प्रदेश में सरकारों की नाकामी कहें या अनदेखी, दशकों से पानी में समाधि लेने वाले कहलूर रियासत के इतिहास को बचाने के लिए कवायद शुरू तो हुई लेकिन इसे सिरे चढ़ाने के लिए कोई बड़ी कोशिश दिखाई नहीं दे रही है। अनदेखी के अभाव में एक बार फिर इस बरसात में भी गोबिंद सागर झील में इस साल फिर से कहलूर रियासत का इतिहास जल समाधि लेने जा रहा है। छठी से 17वीं सदी के बीच बने 28 मंदिरों में से 21 सतलुज पर भाखड़ा बांध बनने के बाद गोबिंद सागर में गायब हो गए थे, लेकिन आठ मंदिर अब तक अपना वजूद जैसे-तैसे बचाए हुए हैं। लेकिन हर साल पानी में छह माह तक रहने के बाद यह इतिहास खुद को जिंदा रखने के लिए कितना संघर्ष कर पाएगा, यह भविष्य के गर्भ में है।
इस साल भारी बारिश होने के कारण यह मंदिर जल्द समाधि लेने जा रहे हैं। झील में पानी भरने लगा है और मंदिरों का एक हिस्सा इसमें समा गया है। सर्दियों से बरसात शुरू होने तक राष्ट्रीय राजमार्ग 21 पर चंडीगढ़ से मनाली तक ड्राइव करने पर बिलासपुर के पास घाटी के नीचे गोबिंद सागर के बीच में शिखर शैली में पत्थर से बनी छतों का शानदार दृश्य दिखाई देता है। जब गर्मियों में पानी का स्तर कम हो जाता है, तो इमारत पूरी तरह से रेतीली झील के तल पर खड़ी हो जाती है, जिससे राहगीरों को उनकी सुंदरता और भव्यता से मंत्रमुग्ध करती है। लेकिन बरसात जब चरम पर होती है तो यह यह मंदिर छह माह के लिए पानी में डूब जाते हैं।





