
#खबर अभी अभी कांगड़ा ब्यूरो*
8 मई 2024

लोकसभा की जंग में कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र कांग्रेस विधायकों के लिए अग्निपरीक्षा का मैदान बन गया है। पार्टी ने चुनावी चेहरा भले ही कद्दावर केंद्रीय नेता आनंद शर्मा को बनाया है लेकिन, असली इम्तिहान विधायकों का ही है। पार्टी प्रत्याशी को जिताने की कठिन जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई है। हाईकमान और मुख्यमंत्री का इस बाबत साफ संदेश है तो उम्मीद पर दिल्ली से बंधे चले आए आनंद भी पार्टी विधायकों से जुट जाने का आह्वान कर चुके हैं। साफ है कि कांगड़ा-चंबा लोकसभा सीट से कांग्रेस का चुनावी चेहरा तो आनंद का होगा लेकिन, सही मायनों में मैदानी जंग उसके विधायक ही लड़ेंगे। हालांकि, पार्टी के अन्य नेताओं, पदाधिकारियों समेत संगठन को भी ताकत दिखानी होगी।
यह दीगर है कि आनंद शर्मा केंद्र की राजनीति में कांग्रेस का कद्दावर चेहरा हैं। कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कामकाज और पार्टी से मिली अहम जिम्मेदारियों को वह संभाल चुके हैं। दिल्ली में उनकी इस सफल सियासी पारी के पीछे का स्याह पहलू यह भी है कि बतौर हिमाचली प्रदेश में उनकी सर्वव्यापी स्वीकारता की कमी झलकती रही है। प्रदेश की सियासत में उनकी छुटपुट हलचल का केंद्र शिमला और इसके आसपास ही ज्यादा रहा है। लिहाजा, कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र में मतदाता रूपी जनता-जर्नादन के लिए वह तो उनके लिए नए कहे जा सकते हैं।
इसी कड़वे सच ने संसदीय क्षेत्र में पार्टी विधायकों की चुनावी भूमिका को निर्णायक बना डाला है। हाईकमान और स्वयं आनंद भी अपने माननीयों के करिश्मे की उम्मीद पाले हैं। इसलिए, पार्टी विधायकों पर 2022 का प्रदर्शन दोहराने का बड़ा दबाव है। दअसल, कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र में सीटिंग एमएलए के संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस अपर हैंड है। यहां से कांगड़ा में कांग्रेस के नौ तो चंबा में दो विधायक हैं। बीजेपी के कांगड़ा में तीन और चंबा में दो विधायक हैं
‘यह चुनाव मेरा नहीं आपका’
सूत्रों के अनुसार धर्मशाला प्रवास के दौरान आनंद शर्मा ने लगातार तीन दिन पार्टी विधायकों को यही संदेश देने की कोशिश कि यह चुनाव मेरा नहीं, आपका ही है। आपको ही लड़ना है। केंद्र स्तर पर विभिन्न मंत्रालयों व संसद में रहते हुए हिमाचल हिमाचल के विकास व हितों के मुद्दे पर अपने योगदान की जानकारी भी दी। केंद्र की सियासत पर अपनी पकड़ और विजन को समझाते हुए आह्वान किया कि लोगों को दोनों प्रत्याशियों के फर्क को समझाएं और विश्वास जगाएं कि कांगड़ा-चंबा के विकास व हितों के मुद्दों पर कौन केंद्र में आवाज उठाने में सक्षम है।





