‘छराबड़ा’ से भी नहीं सधा सीएम का मामला, कांग्रेस को राजस्थान की सियासी अदावत जैसा डर

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

17 मई 2023

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार तो बन गई है, लेकिन अभी भी सबसे बड़ा पेंच मुख्यमंत्री को लेकर फंसा हुआ है। मुख्यमंत्री घोषित न किए जाने के सियासी तपिश न तो बेंगलुरु से दूर हो रही है और ना ही दिल्ली से। और तो और हिमाचल की वादियों के ‘छराबड़ा’ से भी कांग्रेस की यह सियासी तपिश कम नहीं हो रही है। कांग्रेस में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि नतीजे आने के बाद अगले दिन या उसके अगले दिन मुख्यमंत्री घोषित कर दिया गया हो। इससे पहले राजस्थान में भी 2018 के चुनाव परिणामों के बाद मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर कांग्रेस में ऐसी ही रार मची थी। फिलहाल राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कर्नाटक चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार बनने पर यह पेंच तो फंसना ही था

कर्नाटक में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री कौन होगा? इस सियासी तपिश को दूर करने के लिए बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक मैराथन बैठकों का दौर जारी है। सूत्रों की मानें तो सिर्फ कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु और देश की राजधानी दिल्ली ही नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से कुछ किलोमीटर दूर स्थित प्रियंका गांधी के छराबड़ा आवास पर भी कर्नाटक की सियासत तपिश पहुंच रही है। कांग्रेस पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि अनुमान तो यही लगाया जा रहा था कि 13 मई को आए परिणाम के बाद 15 मई तक कांग्रेस का मुख्यमंत्री घोषित कर दिया जाएगा। लेकिन कर्नाटक की सियासत में पेच ऐसा फंसा कि कांग्रेस के आलाकमान की ओर से भी इस पूरे मामले में कई बार सोचना पड़ रहा है। कांग्रेस पार्टी से जुड़े बड़े नेता मानते हैं कि डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया जैसे दोनों बड़े नेताओं में से किसी एक को चुनना पार्टी के लिए सबसे बड़ा चैलेंज था, जो कि वास्तव में दिख भी रहा है।
Karnataka CM Race could not solved even with top party leaders, Congress fears political rivalry in Rajasthan

कर्नाटक का मुख्यमंत्री का नाम घोषित होने में हो रही देरी पर राजनीतिक जानकारों और सूत्रों का मानना है कि कांग्रेस के भीतर दो धड़े ऐसे हैं जो बड़े प्रभावशाली हैं। एक सिद्धारमैया के पक्ष में है, जबकि दूसरा डीके शिवकुमार के पक्ष में। फिलहाल अनुमान यही लगाया जा रहा है कि अब प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी की हिमाचल से वापसी के बाद और राहुल गांधी की सक्रियता से मुख्यमंत्री के नाम का चयन हो सकेगा। कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री के नाम पर देरी की सबसे बड़ी वजह के पीछे राजस्थान में मचे सियासी घमासान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। क्योंकि राजस्थान में 2018 के चुनावों के बाद कर्नाटक जैसी स्थितियां बनी थीं। बाद में जब मामला समझौते के तहत मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पर बना भी तो आज तक दोनों बड़े नेताओं के बीच में न तो आपसी सामंजस्य बना और पार्टी में अंदरूनी राजनीति भी चरम पर पहुंच गई। कर्नाटक में ऐसी स्थिति ना हो इसीलिए पार्टी सोच विचार कर अहम फैसला ले रही है। ताकि अगले साल होने वाले लोकसभा के चुनाव में बड़े नेताओं की आपसी टकराव से पार्टी को कोई नुकसान न हो।

हालांकि इस पूरे मामले में कांग्रेस पार्टी से जुड़े और कर्नाटक के चुनाव में बड़ी भागीदारी निभाने वाले नेता कहते हैं कि पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को कर्नाटक का मुख्यमंत्री घोषित किए जाने की जिम्मेदारी तो दे दी, लेकिन जब परिणाम आने के तीन दिन बाद तक मामला मुख्यमंत्री के नाम घोषित करने का फाइनल नहीं हुआ, तो पार्टी ने अपने शीर्षस्थ वरिष्ठ नेताओं से एक बार फिर से राय मशविरा करना शुरू किया। सूत्रों के मुताबिक प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी छरावड़ा में थीं। जबकि राहुल गांधी से पार्टी लगातार संपर्क में थी।  हालांकि छराबड़ा से कर्नाटक के पूरे सियासी तपिश को न सिर्फ महसूस किया जा रहा था, बल्कि तय निर्देशों के मुताबिक मुख्यमंत्री के नाम घोषित होने का इंतजार भी हो रहा था।

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

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