
कुल्लू-
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जिला कुल्लू* द्वारा शुक्रवार को जिला मुख्यालय कुल्लू में उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदेश सरकार की छात्र एवं युवा विरोधी नीतियों के विरोध में धरना प्रदर्शन किया गया।
परिषद ने प्रदेश में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था, बढ़ती नशाखोरी, युवाओं में बढ़ती असुरक्षा की भावना एवं शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार इन मुद्दों पर प्रभावी और ठोस कार्रवाई करने में असफल रही है।
प्रदर्शन के दौरान परिषद द्वारा निम्नलिखित मांगें प्रमुख रूप से रखी गईं:
प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए एवं बढ़ती नशाखोरी पर कठोर कार्रवाई की जाए।
छात्र संघ चुनाव तत्काल प्रभाव से बहाल किए जाएं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूर्ण रूप से लागू किया जाए।
सरदार पटेल विश्वविद्यालय का दायरा बढ़ाया जाए।
महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रणाली समाप्त कर नियमित शिक्षक एवं गैर-शिक्षक कर्मचारियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय की 112 हेक्टेयर भूमि से संबंधित कार्यवाही पर रोक लगाई जाए।
निजी विश्वविद्यालयों में शिक्षा के बढ़ते व्यापारिकरण पर तत्काल नियंत्रण किया जाए।
मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन” योजना को शीघ्र प्रारंभ किया जाए।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एवं सरदार पटेल विश्वविद्यालय में मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाया जाए।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को समाप्त करने के किसी भी प्रयास को तुरंत बंद किया जाए।
केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला परिसर के भवन निर्माण हेतु लंबित 30 करोड़ रुपये शीघ्र जमा करवाए जाएं।
युवाओं को केवल घोषणाओं के माध्यम से भ्रमित न कर स्थायी एवं सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध करवाया जाए।
परिषद ने कहा कि प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियां विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य के लिए चिंताजनक हैं। शिक्षा व्यवस्था में अस्थिरता, नियमित नियुक्तियों का अभाव, शोधार्थियों के लिए योजनाओं में देरी तथा विश्वविद्यालयों में मूल्यांकन की कमजोर प्रक्रिया विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित कर रही है। वहीं दूसरी ओर कानून व्यवस्था में गिरावट और नशाखोरी की बढ़ती घटनाएं समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।
परिषद ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रदेश सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक एवं ठोस निर्णय नहीं लिया, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद चरणबद्ध, लोकतांत्रिक एवं व्यापक आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। विद्यार्थी परिषद सदैव छात्र एवं राष्ट्रहित के मुद्दों पर संघर्षरत रही है और आगे भी अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।
कुल्लू ब्यूरो सुशांत शर्मा की रिपोर्ट…





