#जम्मू-कश्मीर पब्लिक यूनिवर्सिटी बिल का किया विरोध*

अखिल जसरोटिया ने कहा जम्मू-कश्मीर पब्लिक यूनिवर्सिटी बिल को सभी विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता को छीन कर नौकरशाहों के अधीन करने वाला बताया।

पब्लिक यूनिवर्सिटी बिल के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की घोषणा करते अभाविप के कार्यकर्ता। संवाद

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

18 नवंबर 2022

जम्मू-कश्मीर पब्लिक यूनिवर्सिटी बिल को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर सीधा हमला करार देते हुए बिल के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की घोषणा की हैै। वीरवार को राजकीय डिग्री कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की कॉलेज इकाई अध्यक्ष अखिल जसरोटिया ने कहा जम्मू-कश्मीर पब्लिक यूनिवर्सिटी बिल को सभी विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता को छीन कर नौकरशाहों के अधीन करने वाला बताया।

उन्होंने कहा कि एक तरफ पूरे देश में यूनिवर्सिटी यूजीसी की गाइडलाइन पर चलती है और दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर में पब्लिक यूनिवर्सिटी बिल जैसे काले कानून लाए जा रहे हैं। वर्तमान समय में ही जेके पीएसआई रिक्रूटमेंट स्कैम, फाइनेंसियल अकाउंट असिस्टेंट स्कैम और भी ऐसे कई सारे स्कैम हमें देखने को मिले हैं। अब विश्वविद्यालय की स्वायत्ता को छीन कर भी उसी स्कैम स्टार जेकेएसएसबी के अंतर्गत करने की बात की जा रही है। विद्यार्थी परिषद की स्पष्ट मांग है की विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को छीनने का षड्यंत्र जो कि पब्लिक यूनिवर्सिटी बिल के माध्यम से सरकार द्वारा किया जा रहा है इसे तत्काल प्रभाव से वापस करना चाहिए। क्योंकि शैक्षणिक व्यवस्था में नौकरशाहों का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

वहीं, नगर मंत्री मन्नत ने प्राध्यापक रिक्रूटमेंट का विषय रखते हुए कहा कि यूजीसी के गाइडलाइन के अंतर्गत देखा जाए तो जिस भी विद्यार्थी ने पीएचडी की है उन्हें 30 अंक दिए जाते हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर में नई प्राध्यापक रिक्रूटमेंट में उन्हें सिर्फ 2 अंक दिए जाएंगे जो कि विद्यार्थियों के साथ अन्याय है। विद्यार्थी परिषद का स्पष्ट मानना प्राध्यापक की रिक्रूटमेंट यूजीसी की गाइडलाइन के अंतर्गत ही होनी चाहिए और पीएचडी विद्यार्थियों को 30 अंक ही दिए जाने चाहिए।

कॉलेज की इकाई उपाध्यक्ष शिखा ने भारतीय जनता पार्टी को घेरते हुए कहा कि जो लोग यह नारा देते थे की ‘दो विधान दो प्रधान दो सविधान नहीं चलेंगे’ लेकिन आज भी हम देख रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर और जम्मू-कश्मीर की जनता के लिए दो-दो कानून ही बनाए जा रहे हैं। जिसका वह विद्यार्थी समुदाय विरोध करता है।

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