जानिए क्या होती है आचार संहिता? भारत में इसे पहली बार कब लागू किया गया

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

27 जून 2024

देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग कुछ नियम बनाता है। चुनाव आयोग के इन्हीं नियमों को आचार संहिता कहते (कोड ऑफ कंडक्ट) हैं। संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन संसद और राज्य विधानमंडलों के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्वक चुनावों को आयोजन चुनाव आयोग का संवैधानिक कत्र्तव्य है। लोकसभा/विधानसभा चुनाव के दौरान इन नियमों का पालन करना सरकार, नेता और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी होती है। अगर कोई नियमों की अवहेलना करते हुए पाया गया तो उस पर नियामानुसार सख्त कार्रवाई भी हो सकती है। आचार संहिता चुनाव प्रक्रिया के संपन्न होने तक लागू रहती है। चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही आचार संहिता देश में लगती है और वोटों की गिनती होने तक जारी रहती है। देश में लोकसभा चुनाव हर पांच साल पर होते हैं।

अलग-अलग राज्यों की विधानसभा के चुनाव कार्यक्रमों का ऐलान करते ही आचार संहिता लागू हो जाती है। आचार संहिता लगने के बाद किसी भी तरह की सरकारी घोषणाएं, योजनाओं की घोषणा, परियोजनाओं का लोकार्पण, शिलान्यास या भूमिपूजन के कार्यक्रम नहीं किए जा सकते। सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगले का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता है। किसी भी पार्टी, प्रत्याशी या समर्थकों को रैली जुलूस निकालने या चुनावी सभा करने से पहले पुलिस से अनुमति लेनी होगी। आदर्श आचार संहिता की शुरुआत 1960 में केरल विधानसभा चुनाव से हुई। राजनीति दलों से बातचीत और सहमति से ही आचार संहिता को तैयार किया गया। 1962 के आम चुनाव के बाद 1967 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी आचार संहिता का पालन हुआ। बाद में उसमें और भी नियम जुड़ते चले गए।

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