# टाइगिल हिल पर तिरंगा फहराते ही टूट गई थी पाकिस्तान की कमर : ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर

खबर अभी अभी ब्यूरो सोलन

4 जुलाई  2023

कारगिल युद्ध में 24 साल पहले आज ही के दिन चार जुलाई, 1999 को भारतीय सेना ने टाइगर हिल पर तिरंगा फहराया था। यह दिन हर किसी जहन में आज भी है। इस पल को याद कर हर किसी का सीना फक्र से चौड़ा हो जाता है। युद्ध में कारगिल हीरो का तमगा हासिल करने वाले सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने बताया कि चार जुलाई, 1999 का दिन आज भी हर भारतीय को याद है। 18 ग्रेनेडियर ने 17 हजार फीट ऊंची टाइगर हिल को दुश्मनों के कब्जे से छुड़ाकर तिरंगा फहराया था।

टाइगर हिल पर तिरंगा लहराते ही पाकिस्तान की कमर टूट गई। दुश्मन टाइगर हिल की चोटी पर था और वहां से दुश्मन सीधे श्रीनगर, द्रास, कारगिल व लेह मार्ग पर गोलाबारी कर बाधा पहुंचा रहा था। चार जुलाई का वो दिन आज भी हर भारतीय को याद है, जब 18 ग्रेनेडियर ने टाइगर हिल को दुश्मनों के कब्जे से छुड़ाकर वहां पर अपना तिरंगा फहराया था। टाइगर हिल पर विजय पताका फहराने के लिए देश के करीब 44 जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी।

15 मई से लेकर 2 जुलाई तक 8 सिख के जवानों टाइगर हिल की घेरेबंदी करके रखी। इसके बाद टाइगर हिल पर विजय पताका फहराने का जिम्मा 18 ग्रेनेडियर को दिया था। करीब 36 घंटे ऑपरेशन चलाया और टाइगर हिल पर तिरंगा लहराया। 18 ग्रेनेडियर का नेतृत्व सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर (तत्कालीन कर्नल) ने किया। खुशहाल ठाकुर ने बताया कि 18 ग्रेनेडियर की कमांडो टीम की अगुवाई कैप्टन बलवान सिंह ने की। 36 घंटे चले इस ऑपरेशन के लिए 18 ग्रेनेडियर के जवानों के अपने खाने के सामान को कम करने उस स्थान पर भी असला और बारूद भर लिया।

टाइगर हिल को कब्जाने के लिए हवलदार योगेंद्र यादव  ने लहूलुहान और बुरी तरह घायल होने के बावजूद दुश्मनों की कई चौकियों को तबाह कर दिया। इसी वीरता के लिए हवलदार योगेंद्र यादव को देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर से नवाजा गया। 18 ग्रेनेडियर की कमांडो टीम का नेतृत्व करने वाले कैप्टन बलवान सिंह को महावीर चक्र से सम्मानित किया। टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने लिए कैप्टन सचिन और हवलदार मदन लाल को वीर चक्र से नवाजा गया। टाइगर हिल पर विजय पताका फहराने के लिए चले 36 घंटे के ऑपरेशन में 18 ग्रेनेडियर के 9 जवान शहीद हुए। कारगिल युद्ध में अदम्य साहस के लिए 18 ग्रेनेडियर को 52 वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए। 18 ग्रेनेडियर का नेतृत्व करने वाले तत्कालीन कर्नल खुशहाल ठाकुर को युद्ध सेवा मेडल से नवाजा गया।

खुशहाल ठाकुर ने बताया कि टाइगर हिल की लड़ाई बहुत कठिन थी। 17000 फीट की ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी थी। सूखी और पत्थरीली सीधी चढ़ाई थी, दुश्मन चोटी पर था और छिपने के लिए एक घास का तिनका तक नहीं था। उन्होंने बताया कि जैसे ही टाइगर हिल पर भारतीय सेना ने तिरंगा लहराया पाकिस्तान की कमर टटू गई और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज मुशरफ अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के पास गए और उनसे बिना शर्त युद्ध विराम की गुहार लगाई। लेकिन भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि जब तक भारत की सीमा से घुसपैठियों को खदेड़ नहीं दिया जाएगा, तब तक युद्ध विराम नहीं होगा।

खबर अभी अभी ब्यूरो सोलन

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