धान की पनीरी तैयार करने के लिए उपयुक्त समय

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

18 मई 2023

पालमपुर अप्रैल और मई में हुई बारिश से राज्य के निचले क्षेत्रों में गेहूं की फसल की कटाई के साथ थ्रेसिंग कार्य में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। जिन क्षेत्रों में आलू की पछेती फसल लगाई गई है, वहां पर लेट ब्लाइट का प्रकोप देखा गया है। तेज हवा और बारिश के कारण आम और लीची की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। कृषि विवि पालमपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि इस माह के दूसरे पखवाड़े में धान की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। पौधरोपण के चार सप्ताह पूर्व नर्सरी की बुआई कर देनी चाहिए। लंबी, बौनी और बासमती किस्मों की नर्सरी क्रमश: 20 मई से सात जून और 15 मई से 30 मई के दौरान उगाई जानी चाहिए। बोने से पहले बीज को बाविस्टिन 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करना चाहिए। रोपाई विधि के लिए बीज की आवश्यकता 25-30 किलोग्रामप्रति हेक्टेयर है।

आरपी-2421, सुकरा धान-1, एचपीआर-1068 एवं कस्तूरी बासमती, एचपीआर -2612 और एचपीआर -2143 धान की उन्नत किस्में हैं। मक्का की बुआई 15 मई से जून के प्रथम सप्ताह तथा 20 मई से 15 जून तक ऊंची एवं मध्य पहाड़ियों के क्षेत्र में करनी चाहिए। बीज दर 20 किग्रा प्रति हेक्टेयर या 800 ग्राम कनाल रखें। मक्का को चारा के लिए भी उगाया जा सकता है। सिंचाई वाले क्षेत्रों में मानसून से पहले मई-जून में बिजाई कर चारे की फसल ली जा सकती है। जबकि सब्जी उत्पादन को लेकर सलाह दी है कि प्रदेेश के निचले पर्वतीय क्षेत्रों में जहां टमाटर, बैंगन, मिर्च, शिमला मिर्च व कद्दूू वर्गीय फसलों की मार्च के प्रथम पखवाड़े में रोपाई की है उनकी निराई-गुड़ाई करें।

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

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