
#नेपाल में दिवाली के दिन देश में होती है इस जानवर की पूजा *
दीपावली के दिन त्योहार हमारे देश के आस-पास के हिस्सों में भी दिपावली धूमधाम से मनाई जाती है. वहीं पड़ोसी देश नेपाल में भी इस त्योहार को लोग अलग ही तरीके से मनाते हैं. यहां एक अजीबोगरीब रिवाज़ है. यहां जानवरों की पूजा होती है. खास तौर पर कुत्तों को यहां खूब इज्ज़त बख्शी जाती है |

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
24 अक्टूबर 2022
रामायण में बताया गया है कि भगवान श्रीराम जब लंका के राजा रावण का वध कर पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे तो उस दिन पूरी अयोध्या नगरी दीपों से जगमगा रही थी भगवान राम के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या आगमन पर दिवाली मनाई गई | हर नगर के गांव में दीपक जलाए गए थे.
प्राचीनकाल से चली आ रही इस परंपरा का पालन नेपाल में भी होता है | हालांकि इस त्योहार को नेपाल में दीपावली के बजाय तिहार कहा जाता है. तिहार के अगले ही दिन यहां कुकुर तिहार मनाया जाता है. इस मौके पर देश के कुत्तों का आदर-सत्कार किया जाता है | उन्हें काफी स्पेशल फील कराया जाता है |
ऐसे में साफ है कि इस दिन उन्हीं के त्यौहार होता है कुत्तों को माला पहनाकर तिलक भी लगाया जाता है. खास कुत्तों के लिए व्यंजन बनाए जाते हैं और उन्हें खाने को दिया जाता है. अंडा-दूध और दही खिलाकर कुत्तों को शानदार दावत दी जाती है.
नेपाल में लोगों का मानना है कि कुत्ते मरने के बाद भी अपने मालिक की रक्षा करते हैं. ऐसे में उन्हें दावत देकर संतुष्ट किया जाता है. नेपाल में दीपावली के 5 दिनों में बैल, गाय और कौओं की भी पूजा का रिवाज़ भी नेपाल में है. एक-एक दिन इन जानवरों की पूजा के लिए डेडिकेट किया जाता है और उन्हें खास महसूस कराया जाता है.





