

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
21 नवंबर 2022
शहर की जिन गलियों में जवान बच्चों के सदैव जमावड़ा हुआ करता था आज आलम यह है कि वहां ढूंढते भी युवा दिखाई नहीं देता। आलम यह है कि जो युवक हैं उनको भी जल्द से जल्द यहां से विदेश जाकर सैटल होना है। यह समय की वह हकीकत है जिसका सबको पता है लेकिन न तो सरकारें कुछ कर रही है और न ही ऐसी कोई पहल होती दूर-दूर तक दिखाई दे रही है जिससे युवा पीढ़ी में बनी हुई इस मनोस्थिति को दूर किया जा सके।
लेकिन हकीकत यह भी प्रत्यक्ष रूप से सामने आ रही है कि अब फगवाड़ा सहित पंजाब के दोआबा, मालवा और माझा के कई शहरों और कस्बों में रहते पंजाबी परिवारों के परिवार देखते ही देखते विदेशों में सैटल होने की फिराक में सक्रिय हो गए हैं। जानकारों की राय में यदि यह दौर इसी तर्ज पर जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं है जब अधिकांश पंजाबी परिवारों की पहचान विदेशों में होगी। सबसे ज्यादा हैरानीजनक तथ्य यह देखने को मिल रहा है कि जिन परिवारों के प्रांत में अच्छे भले कारोबार जमे हुए है वह भी अब निरंतर विदेश में जाकर सैटल होने को प्राथमिकता देने लगे है।
पंजाब केसरी के इस संवाददाता द्वारा जब शहर सहित आस पास के कुछ शहरों, गांवों और कस्बों का दौरा कर लोगों से पूछा गया तो सभी ने एक सुर में यहीं दोहराया कि वह परिवार सहित पंजाब को छोड़कर विदेश में जाकर सैटल होना चाहते हैं और इस क्रम में उनके द्वारा तैयारियां पूरी कर ली गई है। जब युवाओं से पूछा गया तो उनका कहना था कि यहां पर न तो भारत सरकार और न ही पंजाब सरकार मामले की गंभीरता को समझ उनके भविष्य के लिए रोजगार संबंधी कोई ठोस पहल कर रही है और न ही मौजूदा समय में ऐसी व्यवस्था दिख रही है जिससे वह यहां पर रहकर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण कर पाएं। ऐसे में उनको विदेशों में जाकर ही बसना होगा। इसी तर्ज पर जब इनके परिजनों से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जहां पर उनके बच्चों के खुशी है वह उसी में खुश है।
नशे की मंडी बने इलाकों से लोग हैं परेशान
अनेक लोगों ने कहा कि शहर सहित आस पास के अनेक इलाके नशों की मंडी बने हुए है। पुलिस तंत्र को सब पता है। लेकिन पुलिस एक्शन बने हुए विकराल हालात के हिसाब से बेहद सुस्त है। कुछ एक मौकों पर पुलिस कार्रवाईयां भी होती है लेकिन हालात दिन व दिन खराब ही होते चले जा रहे है। युवा पीढ़ी को नशे के सौदागर अपने मकड़जाल में फांस सिर्फ चंद रुपए कमाने की खातिर वह सब कर रहे है जो सोचा भी नहीं जा सकता है। ड्रग डीलरों का नेटवर्क इतना जबरदस्त है कि इनसे हर कोई दिल ही दिल में डरता है। कुछ एक मौकों पर तो पूर्व में फगवाड़ा में खुद पुलिस के बड़े अफसर नशे के काले कारोबार में शामिल पाए गए है। ऐसे में वह खुद चाहते हैं कि उनके बच्चे नशे की इस काली दुनिया से दूर विदेश में जाकर मेहनत कर रोजी रोटी कमाएं और उनको भी वहीं पर बुला लें।
युवाओं का पलायन अर्थव्यवस्था पर भी डाल सकता है प्रभाव
मामला सिर्फ पंजाबी युवा पीढ़ी और पंजाबी परिवारों के विदेशों में जाकर सैटल होने का नहीं है। सच्चाई यह है कि यदि उक्त पलायन जारी रहा तो इसका बहुत गंभीर असर पंजाब की अर्थव्यवस्था पर होगा। ओसतन पंजाब में हजारों युवा आइलेट्स का टेस्ट दे रहे हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती चली जा रही है। उक्त टेस्ट देने के लिए हजारों रुपए का खर्चा आता है। इसके उपरांत विदेशों में पढ़ाई करने के लिए लाखों रुपए का खर्च अलग से वाहन करना पड़ता है। यह सारा पैसा डालरों, पौंड में पंजाब के दोआबा, मालवा और माझा से विदेशों कालेजों और विश्वविद्यालयों को जा रहा है। इसके अतिरिक्त कारोबार को विदेश में सैटल करने के इच्छुकों द्वारा ऐसा बहुत कुछ किया जा रहा है जिसका सीधा असर पंजाब पर पड़ता साफ दिखाई देने लगा है। लोगों की इसी चाहत के कारण नई कारोबारी पहल लगभग शून्य होती दिखाई दे रही है और मौजूदा कारोबारी दिशा और दशा आए दिन मंदी की ओर जा रही है।
कारोबार पर भी पड़ रहा असर
विदेशों में जा रही मोटी रकम के कारण इसका सीधा असर प्रदेश में रह रहे लोगों के जीवन पर पड़ता साफ दिखाई दे रहा है। जब युवा पीढ़ी विदेश में हो तो इसका खर्चा परिवारवालों को कुछ हद तक वाहन करना पड़ रहा है। परिणामस्वरूप लोग चाहकर भी खर्च नहीं कर पा रहे है जिसका सीधा असर प्रत्येक कारोबार पर पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त ऐसा बहुत कुछ हो रहा है जिसका अहसास तो सभी को हो रहा है लेकिन हर कोई खामोश है और इसी चाह में जीवन यापन कर रहा है कि वह जल्द विदेश में परिवार सहित होगा। लेकिन इस खामोशी के मध्य बड़ा सवाल यह है कि जब ऐसा होगा तब पंजाब की तस्वीर क्या होगी?





