
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति, किन्नौर और चंबा जिले के दुर्गम क्षेत्रों में वोटर परंपरागत वेशभूषा पहनकर भी मतदान करते हैं। त्योहारों की तर्ज पर ही इस पर्व में भी प्रदेश के लोग हर्षोल्लास और उत्साह के साथ भागीदारी करते रहे हैं।

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
10 नवंबर 2022
लोकतंत्र के पर्व का उत्साह हिमाचल में किसी त्योहार से कम नहीं है। त्योहारों की तर्ज पर ही इस पर्व में भी प्रदेश के लोग हर्षोल्लास और उत्साह के साथ भागीदारी करते रहे हैं। इस दौरान मतदान को लेकर महिलाओं का उत्साह और भागीदारी देखते ही बनती है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति, किन्नौर और चंबा जिले के दुर्गम क्षेत्रों में वोटर परंपरागत वेशभूषा पहनकर भी मतदान करते हैं। यहां की महिलाएं श्रंगार करती हैं और चांदी के परंपरागत गहने पहन सज-धज कर वोट देने मतदान केंद्रों में पहुंचती हैं। किन्नौर की बुजुर्ग महिलाएं भी वोट देने के लिए बाहर निकलने से पहले परंपरागत ऊनी वस्त्र पहनती हैं। पिछले चुनाव में वोटरों के अलावा टशी गंग मतदान केंद्र में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी भी परंपरागत वेशभूषा में आए थे।
प्रदेश के कई इलाकों में लोकतंत्र के महापर्व को मनाने के लिए महिला वोटर चूल्हा-चौका छोड़कर पहले मतदान को निकलती हैं और वोट देने के बाद अपने घरों को लौटती हैं। मतदान करने के बाद ही ये महिलाएं खाना बनाकर परिवार को खिलाती हैं और खुद भी भोजन ग्रहण करतीं हैं। चंबा के दुर्गम क्षेत्र पांगी के कई क्षेत्रों में लोकतंत्र के पर्व के दौरान लोगों में उत्साह का नजारा देखा जा सकता है। कुल्ूलू के आउटर सिराज के क्षेत्रों में भी अधिकांश महिला वोटर परंपरागत वेषभूषा में वोट डालती हैं। शिमला जिले के थानाधार कोटगढ़ क्षेत्र में महिलाएं रेजटा, सदरी, सलवार और कमीज के साथ परंपरागत ढाटू पहनकर वोट देने पहुंचती हैं।





