मंडी क्षेत्र के परम्परागत फलों, जैविक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए कार्य – करें आचार्य ललित कुमार अवस्थी

#खबर अभी अभी मंड़ी ब्यूरो*

25 नवम्बर 2024

सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में इतिहास विभाग व भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) मंडी चेप्टर द्वारा विश्व धरोवर सप्ताह के उपलक्ष्य पर अतिथि व्याख्यान (विरासत चर्चा) का आयोजन इतिहास विभाग माण्डव परिसर में किया गया। आचार्य ललित कुमार अवस्थी कुलपति सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नरेश मल्होत्रा समन्वयक इंटेक ने की। आचार्य अनुपमा सिंह प्रति कुलपति व आचार्य ललित मल्होत्रा वशिष्ट अतिथि व डॉ.तारा सेन मुख्य वक्ता रहीं। कार्यक्रम शुभारम्भ पर इतिहास विभाग के सहायक आचार्य एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ.राकेश कुमार शर्मा ने स्वागत करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य मंडी क्षेत्र की जैव विविधता, परंपराओं और जंगली फलों के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करना है।

मुख्यातिथि आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) की स्थापना सांस्कृतिक धरोहर का सरंक्षण करने के लिए की गई है I उन्होंने इंटेक के सभी पदाधिकारियों सांस्कृतिक विरासत के सम्बन्ध में कार्य करने के लिए बधाई दी तथा भविष्य में भी इंटेक और सरदार पटेल यूनिवर्सिटी मंडी मिल करके सांस्कृतिक धरोहरों के साथ युवाओं को जोड़ने का काम करते रहेंगे I उन्होंने आवाहन किया कि सरदार पटेल यूनिवर्सिटी मंडी कम से कम पांच गावों को गोद लेकर वहां पर उत्पन्न होने वाले जंगली फलों जैसे काफल, हिसालू, आंवला और बेड़ाना इत्यादि के प्रसंस्करण के बारे में बता कर उनके के लिए आय के नए स्रोत उत्पन्न करने में सहायता करेंगे , ताकि इन जंगली ( कीटनाशक मुक्त ) फलों व इनसे बने उत्पादों को को देश के सभी हिस्सों में पहुँचाया जा सके I

इससे दोहरा लाभ होगा, एक तरफ आम जन की आय में वृद्धि होगी तथा लोगों को कीटनाशक रहित फल व उससे उत्पन्न होने वाले पदार्थ जैसे आचार, जैम, जूस और पुड़ें इत्यादि मिलेंगे I विद्यार्थियों को केवल इनकी जानकारी ही नहीं अपितु इनके उपयोग एवं महत्त्व को भी समझने की आवश्यकता है। उन्होंने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि मंडी क्षेत्र के जैविक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए प्रेरणादायक पहल है। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित सहायक आचार्य वनस्पति विज्ञान वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी डॉ.तारा सेन ने जंगली फलों की औषधीय उपयोगिता और उनके ऐतिहासिक संदर्भ पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि मंडी क्षेत्र के ग्रामीण जीवन में जंगली फलों की गहरी पैठ है। यह न केवल उनके भोजन का हिस्सा रहे हैं बल्कि प्राचीन चिकित्सा प्रणाली में भी इनका विशेष महत्व रहा है।उन्होंने कहा कि जंगली फलों की खेती और व्यापार से न केवल आर्थिक लाभ होता है बल्कि यह क्षेत्रीय परंपराओं को संरक्षित रखने में भी मददगार है। कार्यक्रम अध्यक्ष नरेश मल्होत्रा ने जंगली फलों के संरक्षण और उनके उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए सुझाव देते हुए इनके लिए कार्य करने का आहवान किया। आचार्य अनुपमा सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि तेजी से बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य और शहरीकरण के कारण इन दुर्लभ फलों का अस्तित्व खतरे में है अतः इनके संरक्षण एवं सम्वर्धन के लिए कार्य करना चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में इंटेक के सह समन्वयक अनिल शर्मा ने उपस्थित सभी को धन्यवाद किया और कहा कि जंगली फलों की महत्ता को पहचानकर उनके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। कार्यक्रम में आचार्य राजेश कुमार शर्मा अधिष्ठाताछात्र कल्याण,डॉ.अक्षय कुमार विभागाध्यक्ष भोतिकी विज्ञान विभाग,डॉ.पवन चाँद विभागाध्यक्ष प्रवंधन विभाग, सहायक आचार्य डॉ.शिवान, डॉ.बलबीर, डॉ.रामपाल, विकेश कुमार, शोधार्थी राहुल वेद, इतिहास सोसायटी अध्यक्षता करीमा, सुभम, अनीष, हुमा सहित इतिहास विभाग के छात्र एवं के सदस्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक नीति मंडी चैप्टर के सदस्य ललित कपूर,राजीव कुमार ,गजेंद्र बहल, राजीव वैद्य,बनिता मल्होत्रा, मृदु गोयल, नीरज शर्मा, निशी कपूर व हितेश वैद्य उपस्थित थे।

Share the news