
मंडी,
केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, सोलन द्वारा विकास खंड बल्ह की ग्राम पंचायत बेरी में ‘एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम)’ विषय पर दो दिवसीय मानव संसाधन विकास कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 60 कृषकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभारी अधिकारी केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र सोलन डॉ. स्वरूप कुमार ने किया। उन्होंने आईपीएम के सिद्धांतों एवं घटकों की विस्तृत जानकारी देते हुए रासायनिक कीटनाशकों के अनियंत्रित प्रयोग को कम करने पर जोर दिया। उन्होंने कीट संवेदनशीलता, आर्थिक क्षति स्तर, बीजोपचार, प्राकृतिक शत्रुओं के संरक्षण, जैव-नियंत्रण एजेंट, जैव-कीटनाशकों तथा फेरोमोन ट्रैप के उपयोग सहित सांस्कृतिक, यांत्रिक एवं जैविक विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में सब्जियों एवं रबी फसलों के गुणवत्तापूर्ण उत्पादन में आईपीएम की भूमिका पर चर्चा की गई। कृषकों को विभिन्न कृषि योजनाओं व अनुदानों की जानकारी भी दी गई। मृदा उर्वरता प्रबंधन पर बल देते हुए बताया गया कि जैव-कीटनाशकों व पर्यावरण अनुकूल पद्धतियों के समन्वित प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य सुधारने, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है। आईपीएम से उत्पादन लागत घटती है और लाभ-हानि अनुपात में सुधार संभव है।
अंत में फील्ड भ्रमण के दौरान कृषकों को कीट एवं मित्र कीटों की पहचान तथा फेरोमोन ट्रैप स्थापित करने की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में प्रशिक्षण अधिकारी एफटीसी सुंदरनगर अमर सिंह कौंडल, कृषि विकास अधिकारी बल्ह राजेंद्र ठाकुर तथा सहायक उद्यान विकास अधिकारी बल्ह दीनानाथ सैनी ने भी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया।





