
मण्डी,
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव 2026 के अंतर्गत देवधुन/वाद्ययंत्र एवं देवलु नाटी प्रतियोगिताओं का अंतिम चरण आज छोटी काशी मंडी में सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। आयोजन के दौरान देव समाज और श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह तथा गहरी आस्था का वातावरण देखने को मिला।
इस दौरान अतिरिक्त उपायुक्त मण्डी गुरसिमर सिंह बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। उन्होंने विजेता दलों को पुरस्कृत किया तथा अपने संबोधन में कहा कि शिवरात्रि महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध देव संस्कृति और लोक परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देवधुन और देवलु नाटी जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताएं हमारी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
प्रतियोगिता में कुल 85 देवताओं के बजंत्रियों ने वाद्ययंत्र श्रेणी में भाग लिया, जबकि देवलु नाटी प्रतियोगिता में 9 देवताओं के देवलु नाटी दलों ने हिस्सा लिया। देवलु दलों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर अपनी उत्कृष्ट कला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया और पारंपरिक नाटी की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया।
ढोल-नगाड़ों, करनाल, रणसिंघा एवं अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बन गया। देवधुन की मधुर प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया और हिमाचली लोक संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया।
प्रतियोगिता के परिणामों में देवधुन/वाद्ययंत्र श्रेणी में देव छमांहू खणी बालीचौकी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया, देव अजयपाल कासला द्रंग ने द्वितीय, जबकि देव कांढलू बालाकामेश्वर बग्गी ने तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं देवलु नाटी प्रतियोगिता में देव सुहड़े का गैहरी उतरशाल ने पारंपरिक नाटी की प्रभावशाली प्रस्तुति के बल पर प्रथम स्थान प्राप्त किया, देव छांजणू बालीचौकी ने दूसरा, जबकि देव तुंगासी निहरी सराज तीसरे स्थान पर रहे।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में मुरारी शर्मा, कृष्णा देवी एवं उमेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर जिला भाषा अधिकारी रेवती सैणी, सर्व देवता समिति के महासचिव दिनेश शर्मा सहित देव समाज से जुड़े गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।





