मणिपुर हिंसा के कारण खेती बुरी तरह प्रभावित, राज्य के लोगों को दो वक्त की रोटी नसीब होना होगा भारी

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

5 जुलाई 2023

मणिपुर में खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है। दरअसल, किसान राज्य में हो रही जातीय हिंसा के कारण अपने खेतों में काम करने में असमर्थ हैं और अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो पूर्वोत्तर राज्य में खाद्य उत्पादन प्रभावित होगा। इसकी वजह से आगे चलकर लोगों को दो वक्त की रोटी मिलना मुश्किल हो सकता है।

कृषि विभाग के निदेशक एन गोजेंड्रो ने कहा कि दंगों के कारण किसान खेती करने से डर रहे हैं। करीब 5,127 हेक्टेयर कृषि भूमि पर खेती नहीं हो पाई, जिसकी वजह से 28 जून तक 15,437.23 मीट्रिक टन का नुकसान हुआ। बता दें, राज्य में करीब दो से तीन लाख किसान 1.95 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर धान की खेती करते हैं। थौबल जिले में राज्य में प्रति हेक्टेयर सबसे अधिक उपज है।गोजेंड्रो ने कहा कि अगर किसान इस मानसून सीजन में धान की खेती नहीं कर पाते हैं, तो जुलाई के अंत तक नुकसान और बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग हरसंभव प्रयास कर रहा है। इसलिए विभाग ने ऐसे उर्वरक और बीज तैयार कर लिए हैं, जिनकी कटाई कम समय में की जा सके और पानी की भी कम आवश्यकता पड़े।

कृषि अधिकारी ने कहा कि किसानों की चिंता है कि अगर इस महीने के अंत तक सभी क्षेत्रों में खेती पूरे जोरों पर नहीं की गई तो स्थानीय रूप से उगाए गए ‘मैतेई चावल’ की कमी हो सकती है, जिससे इसकी अगले साल कीमतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि जहां कुछ किसान बिना डरे इंफाल के बाहरी इलाकों में अपने खेतों की देखभाल कर रहे हैं, वहीं कई लोग अपनी जान के डर से पीक सीजन में खेती करने से बच रहे हैं।

बिष्णुपुर जिले के मोइदांगपोकपी क्षेत्र के एक किसान थोकचोम मिलन ने कहा कि उग्रवादियों द्वारा किसानों पर गोलीबारी करने की घटनाओं ने इंफाल घाटी में धान की खेती को बंजर बना दिया है। कुछ लोग डरने के बावजूद खेतों में जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम खेती नहीं करेंगे तो पूरे साल भूखा रहना होगा।

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