
#खबर अभी अभी शिमला ब्यूरो*
21 अगस्त 2024

मधुमेह से लड़ने में जिमीकंद और कचालू जैसी कंद वाली फसलें कारगर साबित हो सकती हैं। यह बात एक अध्ययन में सामने आई है। इस अध्ययन में टाइप-दो प्रकार के मधुमेह के खिलाफ लड़ाई लड़ने में यह मददगार साबित हुआ है।
यह अध्ययन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान कटक, फसल फिजियोलॉजी, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला के जैव रसायन और कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी प्रभाग और केंद्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान भुवनेश्वर के क्षेत्रीय केंद्र ने किया है। इसमें अवधेश कुमार, सौम्या महापात्रा, लोपामुद्रा नायक, मोनालिशा बिस्वाल, उपासना साहू, मिलन कुमार लाल, अमरेश कुमार नायक और कालिदास पाती जैसे विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से शोध किया है।
इन कंद फसलों को दैनिक आहार में शामिल करना, विशेष रूप से चावल खाने वाली आबादी में, मधुमेह और संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने के लिए सरल लेकिन प्रभावी रणनीति हो सकती है। यह शोध वैश्विक मधुमेह महामारी से निपटने के लिए नए खाद्य उत्पादों और आहार संबंधी दिशा-निर्देशों को विकसित करने के लिए एक आशाजनक मार्ग प्रदान करता है।





