मुख्यमंत्री सुक्खू बोले- चार महीने आचार संहिता तो चार आपदा में बीते, 11 महीने युद्धस्तर पर किया काम

# खबर अभी अभी शिमला ब्यूरो*

7 अगस्त 2024

 

मंगलवार को शिमला राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ में आयोजित अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार बनने के बाद चार महीने चुनाव आचार संहिता तो चार प्राकृतिक आपदा में बीते। हमने 11 महीनों में युद्ध स्तर पर काम किया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद चार महीने चुनाव आचार संहिता तो चार प्राकृतिक आपदा में बीते। 11 महीनों में युद्ध स्तर पर काम किया है। सीएम ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाकर आने वाले समय में भविष्य की पीढ़ियों को सुधारेंगे। सीएम सुक्खू ने कहा कि 19 महीने पहले कांग्रेस की सरकार बनी तो प्रदेश आर्थिक कंगाली की स्थिति में था। सरकार ने पाया कि कर्ज के सहारे आगे नहीं बढ़ा जा सकता है। ऐसे में उन्होंने फैसला करना था कि अधिक से अधिक ऋण लेकर प्रदेश को आगे बढ़ाया जाए या फिर कर्ज को सुव्यवस्थित करके आगे बढ़ा जाए। सीएम ने कहा कि कर्ज चुकाने के लिए भी कर्ज लेना पड़ रहा था। एक साल में नीतियों में बदलाव किया। पहले बजट में इसकी झलक थी। एक साल में 2,200 करोड़ रुपये जो जनता के थे, उन्हें महज लुटा दिया जाता था। एक साल में अर्थव्यवस्था में 20 प्रतिशत सुधार हुआ।

बेटियों ने बड़ी संख्या में पुरस्कार लिए
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि आज बेटियां बहुत आगे आई हैं। बेटियों ने बड़ी संख्या में पुरस्कार लिए हैं। कुछ बेटियां कह रही थीं कि डॉक्टर बनेंगी। यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करेंगी और आईएएस बनेंगी।

‘एक ही इच्छा है कि हिमाचल अपने पांव पर खड़ा हो’
सीएम सुक्खू बोले कि उनके परिवार से कोई राजनीति में नहीं था। वह छात्र जीवन में 17 साल की उम्र में जब ग्यारहवीं में थे तो कॉलेज में सीआर का चुनाव लड़ा। बारहवीं में भी उन्होंने सीआर का चुनाव लड़ा। उनके समय तो मां-बाप कहते थे कि कहीं सरकारी नौकरी में लग जाओ। पर उनकी इच्छा यही थी कि राजनीति करेंगे और आगे आएंगे। सीएम ने कहा कि वह जब मुख्यमंत्री बने तो हिमाचल प्रदेश को आगे बढ़ाना का संकल्प लिया। एक ही इच्छा है कि हिमाचल प्रदेश अपने पांव पर खड़ा हो। वह दिल्ली जाते हैं तो भी हिमाचल के अधिकारों की बात करते हैं।

‘प्रदेश के हर व्यक्ति पर 1.25 लाख का ऋण’

सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस सभागार में बैठे हर व्यक्ति और प्रदेश की 75 लाख आबादी पर 1.25 लाख का कर्ज चढ़ा हुआ है। कर्ज आज भी लिया जा रहा है। पर कर्ज को व्यवस्थित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री बोले कि जो आयकर दे सकता है, वह बिजली का 500 और 1,000 रुपये का बिल भी दे सकता है। सरकार ने फैसला लिया है कि जिसकी देने की क्षमता है, उसे देना चाहिए। ऐसे में बिजली के बिलों पर आयकरदाताओं के लिए सब्सिडी घटाने का कड़ा फैसला लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी मुश्किल से कई सालों की मेहनत से एक पक्का मकान बनता है, जो एक ही बरसात ध्वस्त कर देती है। ऐसे परिवारों को बसाने का जिम्मा भी राज्य सरकार का होता है।
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