
धर्मशाला: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश के हितों की जोरदार पैरवी करते हुए कहा कि पंजाब-हरियाणा में बहने वाली अधिकतर नदियां हिमाचल से ही जाती हैं। हिमाचल पानी को अपनी संपत्ति मानता है। ऐसे में इसका लाभ प्रदेश को मिलना चाहिए। हाइड्रो के मामले में हम वेल्थ स्टेट हैं, इसका भी हमें लाभ मिलना चाहिए। हिमाचल के पहाड़ उत्तर भारत को शुद्ध हवा देने के लिए फेफड़ों का काम करते हैं। हमारा फोरेस्ट कवर 28 फीसद है, इसका भी हमें फायदा दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष ओम विड़ला के समक्ष उपचुनाव का समय छह माह की जगह कम से कम एक साल करने की भी जोरदार पैरवी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले विधायकों के खिलाफ दल-बदल कानून को सही तरीके से लागू कर हिमाचल ने पूरे देश को नई राह दिखाई है। प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष ने पूरे देश को डिस्कवालिफाई का रास्ता दिखाया है। ऐसे मसलों पर भी सख्त नियम व कानून बनाने की आवश्कयता है।
मुख्यमंत्री ने पहाड़ी प्रदेशों की पैरवी करते हुए कहा कि पहाड़ी राज्यों के लिए अलग से नीतियां बनाई जानी चाहिए। मैदानी क्षेत्रों के साथ जोडक़र पहाड़ी क्षेत्रों का सही विकास सुनिश्चित नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जीएसटी से ही प्रदेश को नुकसान हुआ है। पहले हिमाचल को चार हजार करोड़ आता था, लेकिन अब दो सौ करोड़ भी नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की जनसंख्या भी पहले की अपेक्षा घट रही है। ऐसे में आने वाले समय में भी जीएसटी का लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का प्रमुखता के साथ सम्मेलन में उल्लेख किया। गौर हो कि राष्ट्रमंडल संसदीय संघ भारत क्षेत्र, जोन-2 का वार्षिक सम्मेलन सोमवार को धर्मशाला के तपोवन स्थित हिमाचल प्रदेश विधानसभा परिसर में शुरू हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सडक़ मार्ग के जरिए शिमला से धर्मशाला पहुंचे। विधानसभा परिसर में पहुंचने पर संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान, विधायकों और विधानसभा सचिव, अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।





