र्वोत्तर में चुनाव नतीजों के बाद क्षेत्रीय दलों के हौसले बुलंद, अगप ने भरी हुंकार

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

5 मार्च 2023

पूर्वोत्तर के तीन राज्यों- मेघालय, त्रिपुरा और नगालैंड में क्षेत्रीय दलों के प्रदर्शन से क्षेत्रीय दलों के हौसले बुलंद हैं। चुनाव परिणामों से स्पष्ट है कि भारतीय जनता पार्टी क्षेत्रीय दलों की मदद से ही अपना जनाधार बढ़ा रही है। बहुमत भले ही मिला हो, लेकिन त्रिपुरा में टिपरा मोथा पार्टी ने पहली बार चुनाव लड़ा और 13 सीटों पर कब्जा कर लिया। भले ही भाजपा ने 32 सीटें जीतकर बहुमत पा लिया, लेकिन वहां पर भी भाजपा का गठबंधन इंडेजेनियसश पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने उसका साथ दिया है। मेघालय में नेशनलिस्ट पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) 26 सीटें लेकर पहले स्थान पर रही, जबकि दूसरी क्षेत्रीय पार्टी यूडीपी ने 11 स्थानों पर कब्जा किया है, भाजपा ने मात्र दो सीटें जीती हैं। नगालैंड में नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी)  ने 60 में से 25 सीटों पर कब्जा कर लिया। वहां पर भी भाजपा के साथ सरकार बनने जा रही है। पूर्वोत्तर में भाजपा की असली ताकत क्षेत्रीय दल है। असम में भी भाजपा असम गण परिषद और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरेशन के साथ सरकार चला रही है।

इन राज्यों के चुनावों में क्षेत्रीय दलों की सफलता से असम गण परिषद उत्साहित है।  असम गण परिषद ने लोकसभा चुनाव की तैयारी आरंभ कर दी है। गत चार मार्च को बोकाखात में कलियाबर लोकसभा के कार्यकर्ताओं की सभा ने अगप ने आगे की रणनीति स्पष्ट कर दी है। असम की सबसे ताकतवर क्षेत्रीय पार्टी ने अपनी ताकत दिखाने के लिए कार्यकर्ताओं की बैठक के बहाने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। अगप अध्यक्ष अतुल बोरा के अनुसार अगप ही असम के क्षेत्रीय हितों की रक्षा कर सकती है। अगप असम का सबसे पुराना क्षेत्रीय दल है। क्षेत्रीयतावाद की रक्षा के लिए ही अगप ने भाजपा के साथ हाथ मिलाया है, क्योंकि मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा शर्मा ने असमियावाद को नए सिरे से परिभाषित किया है।

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