
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
26 जुलाई 2023

कारगिल युद्ध में 3 जुलाई को शहादत का जाम पीने वाले शहीद स्वामी दास चंदेल के पुत्र भी देश की रक्षा में जुटे हैं। पिता की शहादत के समय तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले रजनीश ने भी देश सेवा की ठानी और 2010 में सेना में भर्ती हुए। कारगिल युद्ध में तीन जुलाई 1999 को गांव समलेहड़ा, डाकघर बगवाड़ा, तहसील भोरंज, हमीरपुर निवासी हवलदार स्वामी दास की शहादत हुई तो बड़ा बेटे मुनीष नौवीं कक्षा में, बहन दसवीं कक्षा में, जबकि छोटा भाई रजनीश तीसरी कक्षा में पढ़ता था। रजनीश चंदेल ने बताया कि जुलाई 1999 में पिता हवलदार स्वामी दास चंदेल को सेना से सेवानिवृत्त होना था।
फोन और चिट्ठी के जरिये पिता घर पर सेवानिवृत्ति के अवसर पर प्रस्तावित समारोह की तैयारियों के बारे में पूछते रहते थे। मगर सेवानिवृत्ति समारोह से कुछ दिन पहले ही पिता कारगिल युद्ध छिड़ गया। कारगिल युद्ध में पिता शहीद हो गए। तब रजनीश और उसके भाई-बहन राजकीय पाठशाला बगबाड़ा में ही पढ़ते थे। पिता की शहादत पर रजनीश ने भी भारतीय सेना में जाकर देश की रक्षा करने की ठानी और वर्ष 2010 में भारतीय सेना में भर्ती हुए। वर्तमान में वह भारतीय सेना की ग्रेनेडियर रेजिमेंट में नायक के रैंक पर सेवारत हैं। वर्ष 2016 से 2018 तक खुद रजनीश चंदेल जम्मू-कश्मीर में तैनात रहे।
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*





