शीतोष्ण फलों के बागीचों प्रबंधन पर कार्यशाला

ख़बर अभी अभी सोलन ब्यूरो

10 जून  2024

डॉ. यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के फल विज्ञान विभाग ने 8-9 जून को विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में ‘शीतोष्ण फलों में उद्यान प्रबंधन’ पर दो दिवसीय कार्यशाला की सफलतापूर्वक मेजबानी की। इस कार्यशाला में लगभग 100 किसानों ने भाग लिया।

कार्यशाला का उद्घाटन विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ इंद्र देव ने किया। नौणी पंचायत के प्रधान मदन हिमाचली और अखिल भारतीय हिमाचल सामाजिक महासंघ के पदाधिकारी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने में उच्च घनत्व वृक्षारोपण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में चल रही अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला।

पहले दिन प्राकृतिक खेती पर केंद्रित किसान-वैज्ञानिक संवाद सत्र आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय की प्राकृतिक खेती टीम-डॉ. सुभाष वर्मा, डॉ. उपेन्द्र सिंह और डॉ. प्रमोद कुमार ने इस पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धति के बारे में जानकारी साझा की और बताया कि आसानी से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके विभिन्न इनपुट कैसे तैयार किए जा सकते हैं। किसानों ने विश्वविद्यालय के कीवी फल के बगीचों और प्राकृतिक खेती-प्रबंधित खेतों का भी दौरा किया।

रविवार को, व्याख्यान में उच्च घनत्व वृक्षारोपण में उद्यान प्रबंधन, एकीकृत रोग प्रबंधन, और शीतोष्ण फलों के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन प्रथाओं जैसे विषयों को शामिल किया गया। डॉ. नवीन शर्मा, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. नीलम कुमारी और डॉ. मीना ठाकुर ने संसाधन कर्मी के रूप में कार्य किया।

परागण सेवाओं के लिए मधुमक्खियों के महत्व और मधुमक्खी पालन से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की गई। समापन सत्र की अध्यक्षता बागवानी महाविद्यालय के डीन डॉ. मनीष शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि बागवानी कृषक समुदाय के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। उन्होंने किसानों को उत्पादन और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए नवीन वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

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