संतान की जिंदगी पर आई आंच तो मां ने अपना अंग देकर बचाई जान

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

14 मई 2023

उसको जब भी देखती हूं मेरी मन्नत पूरी हो जाती है, उसमें, उससे, उस पर ही मेरी दुनिया पूरी हो जाती है… यह चंद लाइनें बच्चों की जिंदगी में उनकी मां के महत्व को बयां करने के लिए काफी हैं। बच्चों को दुनिया में लाने के साथ ही उन पर आने वाले हर एक मुसीबत के सामने ढाल बनकर खड़ी होने वाली मां यह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकती कि उसकी आंखों के सामने उसका बच्चा हर पल मौत के करीब जाए

इसके लिए भले ही उसे अपने जीवन का बलिदान देना पड़े, लेकिन वे अपने बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए हर हद को पार करने के लिए तैयार रहती है। इस मदर्स डे ऐसे ही माताओं की कहानी हम पेश कर रहे हैं जिन्होंने अपनी बच्चे की जिंदगी पर आंच आने पर अपने जीवन की परवाह किए बिना अंग का दान कर मिसाल कायम की है। अपनी माताओं के अंगों को पाकर दूसरा जीवन मिलने पर वे बच्चे अपनी मां में ईश्वर की प्रतिमूर्ति को देखते हैं।

उनका कहना है कि उसको नहीं देखा हमने कभी पर इसकी जरूरत क्या होगी, ए मां तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी। मोहाली निवासी 42 वर्षीय अंजू को 2020 में पता चला कि उनकी बेटी अक्षरा की दोनों किडनी खराब हो चुकी है। 19 साल की बेटी के जिंदगी में अचानक आए इस तूफान ने जैसे अंजू को तोड़कर रख दिया। लेकिन मां होने के नाते उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बीमारी का पता चलते ही बिना कुछ सोचे अंजू ने तय कर लिया कि वह अपनी बेटी की जान बचाने के लिए अपनी किडनी उसे देंगी।

कोविड-19 के कारण दो साल तक किडनी प्रत्यारोपण नहीं हो पाया। इस दौरान इलाज के लिए अंजू और उनके पति अमित कुमार देश के अलग-अलग कोनों में अक्षरा को लेकर गए। लेकिन सफलता नहीं मिली। अंत में किडनी ट्रांसप्लांट करा चुके ऋषि ने उन्हें पीजीआई के बारे में बताया।

उनकी मदद से वे पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग में पहुंचे। वहां डॉ. एचएस कोहली की देखरेख में उनकी टीम ने अंजू की किडनी को अक्षरा में प्रत्यारोपित किया। किडनी प्रत्यारोपण 2022 अगस्त में हुआ। अब अंजू और अक्षरा बिल्कुल ठीक हैं। भावुक अक्षरा ने कहा कि मेरी मां ने मुझे एक नहीं दो जन्म दिए हैं। एक बार इस दुनिया में लाकर और दूसरी बार किडनी खोने पर अपनी किडनी दान कर।

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