
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
28 मई 2023
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने साक्षात्कार बोर्ड के निर्णय के संबंध में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने अपने निर्णय में कहा कि साक्षात्कार बोर्ड के निर्णय को निरस्त करना न्यायोचित नहीं है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि चयन समिति के ज्ञान के स्थान पर अपने स्वयं के विचारों को प्रतिस्थापित करना अदालत के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है। अदालत ने विजय कुमार पुरी की याचिका को खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया।
याचिकाकर्ता ने प्रदेश विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर पद को भरने वाले साक्षात्कार बोर्ड के निर्णय को चुनौती दी थी। आरोप लगाया गया था कि हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी ने विभिन्न धाराओं में सहायक प्रोफेसर के पदों को विज्ञापित किया था। याचिकाकर्ता ने पूरी तरह से पात्र होने के नाते हिंदी विषय में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन किया। पूरी तरह से पात्र होने पर उसे साक्षात्कार के लिए बुलाया गया।
साक्षात्कार बोर्ड ने उसकी योग्यता के आधार पर 80 में से 36.75 अंक दिए। दूसरी उम्मीदवार पूनम चौहान को 38.15 अंक दिए गए। यह भी आरोप लगाया गया कि प्रकाशन कार्य के लिए याचिकाकर्ता को पांच में से सिर्फ 2.5 अंक दिए गए। जबकि, याचिकाकर्ता के प्रकाशन कार्य को देखते हुए उसे पूरे अंक दिए जाने चाहिए थे। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन पर पाया कि बाकी अभ्यर्थियों को प्रकाशन कार्य के लिए कोई भी अंक नहीं दिए गए थे।
अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि साक्षात्कार बोर्ड के सदस्य तकनीकी विशेषज्ञता और वास्तविक दिन-प्रतिदिन का समृद्ध अनुभव रखने वाले होते हैं। जिनके निर्णय के स्थान पर अदालत को अपना निर्णय प्रतिस्थापित करना न्यायोचित नहीं है।
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